मुश्किलों को मात देकर बनीं 'डाटा एंट्री सखी': राजीविका से जुड़कर रेखा देवी सैन ने बदली अपनी तक़दीर
भीलवाड़ा के खजूरी गांव की रेखा देवी सैन ने राजीविका से जुड़कर 'डाटा एंट्री सखी' के रूप में नई पहचान बनाई। जानिए कैसे बदली उनकी जिंदगी।

तस्वीर में रेखा देवी सैन अपने कार्यालय के मेज पर कंप्यूटर, प्रिंटर और दस्तावेजों के साथ कार्य करती नजर आ रही हैं।
भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर ब्लॉक के छोटे से गाँव खजूरी की रहने वाली रेखा देवी सैन ने सीमित आय, पारिवारिक आर्थिक चुनौतियों और भविष्य की अनिश्चितताओं के बीच अपने हुनर और मेहनत के दम पर आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनाई है। नियमित रोजगार और तकनीकी ज्ञान के अभाव के बावजूद उन्होंने अवसर मिलने पर उसे सफलता में बदलकर 'डाटा एंट्री सखी' के रूप में अपनी अलग पहचान स्थापित की है।
रेखा देवी सैन अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना चाहती थीं, लेकिन उनके पास न तो नियमित आय का कोई साधन था और न ही कोई विशेष तकनीकी कौशल। इसके बावजूद उनके भीतर कुछ नया करने और अपने जीवन में बदलाव लाने की दृढ़ इच्छा हमेशा बनी रही। इसी दौरान उन्हें 'राजीविका' (राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद) के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने हिम्मत जुटाकर गाँव की अन्य महिलाओं के साथ तेजाजी स्वयं सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया, जिसने उनके जीवन को नई दिशा दी।
स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनका आत्मविश्वास लगातार बढ़ता गया। वे बजरंगबली ग्राम संगठन (वीओ) और खजूरी क्लस्टर स्तरीय महासंघ (सीएलएफ) की बैठकों में सक्रिय रूप से भाग लेने लगीं। इसी दौरान राजीविका के तहत उन्हें तकनीकी क्षमता विकास और डेटा प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त हुआ। कंप्यूटर और डिजिटल तकनीक, जो कभी उनके लिए किसी पहेली से कम नहीं थी, उसे उन्होंने लगन और निरंतर अभ्यास के बल पर सीख लिया।
प्रशिक्षण के दौरान रेखा देवी सैन ने कंप्यूटर संचालन, डिजिटल अभिलेख संधारण तथा एमआईएस (MIS) पोर्टल पर डेटा प्रविष्टि का कार्य सीखा। विभाग के निरंतर मार्गदर्शन और उनकी मेहनत ने उन्हें उस मुकाम तक पहुंचाया, जहां कभी तकनीकी उपकरणों से अनजान रहने वाली महिला आज एक सक्षम 'डाटा एंट्री सखी' के रूप में कार्य कर रही हैं।
वर्तमान में रेखा देवी सैन खजूरी क्लस्टर स्तरीय महासंघ में डाटा एंट्री सखी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। वे सीएलएफ के डिजिटल रिकॉर्ड का संचालन करती हैं और एमआईएस पोर्टल पर डेटा एंट्री की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इस बदलाव से उनकी नियमित आय सुनिश्चित हुई है, जिससे उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और अब वे अपने परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं को बिना किसी पर निर्भर रहे पूरा कर पा रही हैं।
आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ-साथ रेखा देवी सैन को परिवार और पूरे गाँव में नई पहचान और सम्मान भी मिला है। आज वे उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो अपने पैरों पर खड़े होकर आत्मनिर्भर बनने का सपना देख रही हैं।
रेखा देवी सैन कहती हैं, "अगर मन में विश्वास हो और सही मार्गदर्शन मिले, तो गाँव की चौखट से निकलकर भी डिजिटल दुनिया में अपनी सफलता का परचम लहराया जा सकता है।"
रेखा देवी सैन की यह यात्रा केवल एक महिला के रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बदलाव की मिसाल है, जिसमें सही अवसर, प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प के बल पर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर समाज में नई पहचान स्थापित कर रही हैं।

Pratahkal Bureau
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