भीलवाड़ा — राजस्थान के बजट सत्र 2025–26 में संविदा कर्मियों के लिए बड़ी राहत के रूप में की गई घोषणा अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। माननीय उपमुख्यमंत्री द्वारा संविदा सेवा नियम–2022 के तहत अनुभव में दो वर्ष की छूट देने की घोषणा के बावजूद विभागीय आदेश जारी न होने से पंचायत शिक्षकों और विद्यालय सहायकों में गहरी निराशा और रोष व्याप्त है। इसी क्रम में राजस्थान पंचायत शिक्षक विद्यालय सहायक संघ ने भीलवाड़ा में अपनी आवाज बुलंद की।

प्रदेशाध्यक्ष प्रवीण जसरापुर के आह्वान पर भीलवाड़ा जिलाध्यक्ष महावीर प्रसाद स्वर्णकार के नेतृत्व में संघ के प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए अतिशीघ्र आदेश जारी करने की मांग की। ज्ञापन के माध्यम से सरकार को बजट में किए गए वादे की याद दिलाते हुए संविदा कर्मियों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।

जिलाध्यक्ष महावीर प्रसाद स्वर्णकार ने बताया कि शिक्षा विभाग में कार्यरत लगभग 23,740 पंचायत शिक्षक और विद्यालय सहायक ऐसे हैं, जिनका अनुभव 31 मार्च 2025 तक पूर्ण हो चुका है। बजट में अनुभव में दो वर्ष की शिथिलता देने की घोषणा से इन कार्मिकों के नियमितीकरण का मार्ग प्रशस्त होना था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक आदेश जारी नहीं होने से प्रक्रिया ठप पड़ी हुई है।

संघ ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि यदि संविदा नियम–2022 के अंतर्गत अनुभव में दो वर्ष की छूट का विभागीय आदेश तुरंत जारी किया जाता है, तो प्रदेश के हजारों अल्प मानदेय पर कार्यरत संविदा कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा और वर्षों से लंबित नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। साथ ही 31 मार्च 2025 तक अनुभव पूर्ण कर चुके कार्मिकों की फाइलें शीघ्र अग्रसारित करने की मांग भी की गई।

इस दौरान संघ पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया, तो संगठन को प्रदेश स्तर पर आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। ज्ञापन सौंपने के समय राजेश कुमार मीणा, भैरूलाल पारीक, कालू सिंह राजपूत, अनिल पारीक, बाबूलाल सरगरा, भंवरलाल कुमावत, बलदेव रेगर, अनिल कुमार व्यास, रामप्रसाद जाट, दिनेश कुमार शर्मा, हेमराज रेबारी, रामलाल जाट, श्यामलाल शर्मा, नानालाल सेन, शिवराज सिंह चुण्डावत, रतनलाल अहीर और पुष्पा कुमारी बैरवा सहित जिले के समस्त पंचायत शिक्षक एवं विद्यालय सहायक उपस्थित रहे।

बजट घोषणा और जमीनी हकीकत के बीच बढ़ता यह अंतर अब सरकार के लिए एक बड़ी परीक्षा बनता जा रहा है, क्योंकि हजारों संविदा कर्मियों का भविष्य इस आदेश से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।

Pratahkal Newsroom

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