भीलवाड़ा में गर्मी का रिकॉर्ड टूटा, तापमान में भारी बढ़ोतरी से जनजीवन प्रभावित
जेठ की तपिश के कारण भीलवाड़ा में सीजन का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, आगामी दो-तीन दिनों तक लू और भीषण गर्मी का प्रकोप जारी रहने का अनुमान।

जिले में जेठ की तपिश ने अपना रौद्र रूप दिखाते हुए जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सूर्यदेव के तीखे तेवरों के कारण एक ही दिन में इस सीजन का सबसे भीषण और गर्म दिन दर्ज किया गया, जिससे भीलवाड़ा में तापमान ने अब तक के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। सुबह से ही तेज धूप और लू का प्रकोप शुरू हो गया, जो दोपहर तक अंगारों जैसी तपिश में बदल गया। आसमान से बरसती आग और सड़कों से उठती गर्मी के चलते दोपहर के समय बाजारों में अघोषित कर्फ्यू जैसा दृश्य उत्पन्न हो गया।
मौसम विभाग के अनुसार भीलवाड़ा में पारे ने इस सीजन के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। केवल दिन ही नहीं, बल्कि अब रातें भी असहनीय गर्मी से झुलसाने लगी हैं। न्यूनतम तापमान में भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे रात के समय भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। उमस और तेज तपन के कारण मकानों की दीवारें और छतें भट्टी की तरह तप रही हैं, जिससे पंखे और कूलर भी गर्म हवा उगल रहे हैं।
भीषण गर्मी के चलते शहर की सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और मुख्य बाजार पूरी तरह सुनसान नजर आए। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलग-अलग दृश्य देखने को मिले, जहां एक ओर शहर में सन्नाटा था, वहीं ग्रामीण इलाकों में बच्चे खेतों और बगीचों में सिंचाई के पाइपों से बहते ठंडे पानी में डुबकियां लगाकर राहत पाने की कोशिश करते नजर आए। कई स्थानों पर बच्चों ने बड़े प्लास्टिक टबों में पानी भरकर गर्मी से बचने का देसी जुगाड़ अपनाया।
गर्मी से राहत पाने के लिए लोग गन्ने के रस, छाछ, राबड़ी और शिकंजी जैसे पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं। लोग चेहरे को स्कार्फ, हेलमेट और सूती कपड़ों से पूरी तरह ढककर ही बाहर निकल रहे हैं। केवल इंसान ही नहीं, बल्कि बेजुबान पशु-पक्षी भी इस भीषण ताप से बेहाल हैं और छांव तथा पानी के बर्तनों के आसपास मंडराते दिखाई दे रहे हैं।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार आने वाले दो से तीन दिनों तक गर्मी के तेवर इसी तरह तीखे बने रहने की संभावना है और तापमान में और वृद्धि हो सकती है। फिलहाल भीलवाड़ा वासियों को इस झुलसाने वाली गर्मी से किसी प्रकार की तत्काल राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं, जिससे जनजीवन पर इसका व्यापक प्रभाव जारी रहने की स्थिति बनी हुई है।

Pratahkal Bureau
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