भीलवाड़ा में गेहूं आवंटन संकट: जुलाई से बाहरी उपभोक्ताओं को राशन बंद की चेतावनी
भीलवाड़ा शहर उचित मूल्य दुकानदार संघ ने सीमित गेहूं स्टॉक और बाहरी उपभोक्ताओं के बढ़ते दबाव को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अतिरिक्त आवंटन की मांग की।

भीलवाड़ा में राशन डीलरों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने की प्रशासनिक प्रक्रिया।
भीलवाड़ा शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों की उचित मूल्य दुकानों पर लंबे समय से जारी गेहूं की किल्लत को लेकर राशन डीलरों ने गंभीर रुख अपनाया है। स्थिति को लेकर शुक्रवार को ‘भीलवाड़ा शहर उचित मूल्य दुकानदार संघ’ के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जुलाई 2026 से गेहूं का अतिरिक्त आवंटन नहीं बढ़ाया गया तो बाहरी उपभोक्ताओं को राशन वितरण संभव नहीं होगा।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संघ अध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा ने किया। ज्ञापन में बताया गया कि पिछले 8 से 10 महीनों से गेहूं के सीमित आवंटन के कारण दुकानों पर भारी दबाव बना हुआ है। ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ योजना और ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद अन्य जिलों, तहसीलों और राज्यों से आए हजारों श्रमिक भी भीलवाड़ा की दुकानों से राशन प्राप्त कर रहे हैं। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग 5 से 6 हजार उपभोक्ता भी शहर की दुकानों पर निर्भर हैं, जिससे मूल उपभोक्ताओं के हिस्से का गेहूं प्रभावित हो रहा है।
डीलरों ने आरोप लगाया कि सीमित स्टॉक के चलते जब बाहरी उपभोक्ताओं को रोका जाता है तो विवाद की स्थिति उत्पन्न होती है। साथ ही मुख्यमंत्री पोर्टल पर झूठी शिकायतें दर्ज कराने और मारपीट की धमकियों तक के मामले सामने आ रहे हैं, जिससे उचित मूल्य दुकानदारों को लगातार दबाव और अभद्र व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में एनएफएसए आवंटन प्रणाली में विसंगतियों का भी उल्लेख किया गया। इसमें कहा गया कि सरेंडर या गिव-अप किए गए कार्डों के अनुसार आवंटन तुरंत घटा दिया जाता है, लेकिन नए जुड़े पात्र परिवारों का गेहूं आवंटन दुकानों तक नहीं पहुंच रहा है। इसके अलावा अन्य राज्यों के उपभोक्ताओं को दिए गए गेहूं पर मिलने वाला कमीशन भी लंबे समय से बकाया बताया गया है।
डीलरों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में बचा हुआ अतिरिक्त गेहूं शहर की दुकानों में डायवर्ट किया जाए, बकाया कमीशन का शीघ्र भुगतान हो, ग्रामीण उपभोक्ताओं की सीडिंग स्थायी रूप से शहर में की जाए और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
यह मामला अब प्रशासनिक स्तर पर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो भीलवाड़ा की सार्वजनिक वितरण व्यवस्था पर सीधा असर पड़ सकता है।

Pratahkal Bureau
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