भीलवाड़ा: राष्ट्र संत पुलकसागरजी ने बताए शुद्धोपयोगी और शुभोपयोगी मुनि के भेद
शास्त्रीनगर में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन में आचार्य पुलकसागर ने मुनियों की साधना, समाज में आचरण के महत्व और पर्युषण पर्व की तैयारियों पर प्रकाश डाला।

तस्वीर में आचार्य पुलकसागर के सानिध्य में एक कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा, 12 सितंबर। धर्म केवल बातों में नहीं, बल्कि आचरण में होना चाहिए। संतों की शैली अलग-अलग हो सकती है, लेकिन सभी का लक्ष्य एक ही है—भगवान महावीर के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना। ये विचार भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ने शनिवार को शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में आयोजित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए।
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से आयोजित प्रवचन में आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जिनकी बेटी होती है, वे सभी कन्यादान करते हैं। नोटों का दान करने वाले भी कम नहीं हैं, लेकिन जिनशासन की सेवा और समाज के लिए संतान का दान करने वाले माता-पिता दुर्लभ होते हैं। धन्य हैं वे माता-पिता, जिन्होंने महावीर के मार्ग पर जाने के लिए अपनी संतान सौंप दी।
उन्होंने कहा कि मुनियों की बुराई करना आसान है, लेकिन मुनि जैसा जीवन जीना बहुत मुश्किल होता है। मुनि बनने के लिए अपनी ख्वाहिशों और तमन्नाओं का त्याग करना पड़ता है। वासना में जीने वाले मुनियों का महत्व नहीं समझ सकते। मिथ्यादृष्टि से नहीं, महावीर के चश्मे से देखो, तब मुनि नजर आएंगे।
आचार्यश्री ने समाज में मुनियों के प्रति द्वेष भरे जाने पर अफसोस जताया। उन्होंने कहा कि पापियों और चाटुकारों के आगे-पीछे घूमने वालों को मुनियों को नमस्कार करने में सम्यकत्व नष्ट होने का खतरा प्रतीत होता है। परमात्मा महावीर की परंपरा और उनके मुनियों की बुराई नहीं होनी चाहिए। मुनि साधना भगवान की करते हैं और जिंदगी श्रावक के बल पर जीते हैं।
उन्होंने शुद्धोपयोगी एवं शुभोपयोगी मुनि के भेद समझाते हुए कहा कि शुद्धोपयोगी मुनि चतुर्थ काल में होते थे। वर्तमान पंचम काल के मुनि शुभोपयोगी होने से उनमें कोई ऋद्धि नहीं होती है। शुभोपयोगी मुनि दिन में एक बार आहार, दो बार प्रतिक्रमण, तीन बार सामायिक एवं चार बार स्वाध्याय करते हैं। वहीं शुद्धोपयोगी मुनि महीनों या वर्षों में एक बार आहार करते हैं। कोई दोष नहीं लगने से प्रतिक्रमण जरूरी नहीं होता और वे हर पल सामायिक में रहते हैं। उनमें आगम समाहित रहता है, इसलिए उन्हें पढ़ना नहीं पड़ता।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि इस पांचवें काल में कोई सम्यक दृष्टि वाला नहीं है, इसलिए यह मत कहो कि हम सम्यक दृष्टि हैं और वह मिथ्यादृष्टि है। शुद्धोपयोगी मुनि वीतरागी होते हैं, लेकिन शुभोपयोगी मुनि वीतरागी नहीं होकर वैरागी होते हैं। ये वैरागी घर-परिवार और सांसारिक पद-प्रतिष्ठा, व्यापार सभी का त्याग करते हैं। इनका उपयोग अशुभ से शुभ में होने के कारण ये शुभोपयोगी मुनि हो गए हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे मुनि वैरागी और धर्मानुरागी होकर तीर्थंकरों की स्तुति करते हैं एवं अशुभ कार्य और पापों से वैराग लेते हैं। तीर्थंकर वीतरागी होने से मोक्ष गए, लेकिन वैरागी को मोक्ष नहीं होता। कई जन्मों तक वैराग धारण करने पर वह वीतरागी होकर मोक्ष जा सकता है। शुभोपयोगी मुनि का वेश बाहर से शुद्धोपयोगी जैसा होता है, लेकिन परिणाम वैसा नहीं होता है।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में पर्युषण (दशलक्षण) पर्व की साधना 16 से 25 सितंबर तक सूर्यमहल में होगी। इस अवधि में आयोजित होने वाले दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर के लिए सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने पंजीयन कराया है।
प्रवचन के शुरू में दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य संभव, तनसुख, श्रेयांश, तन्मय गदिया परिवार ने प्राप्त किया। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।
प्रतिदिन चातुर्मासिक प्रवचन सुबह 8.30 से 10 बजे तक सूर्यमहल में हो रहे हैं। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara
नाम: राजेश तोषनीवाल
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस
परिचय
राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।
- वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
- इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
