भीलवाड़ा में स्थानीय आकृति कला संस्थान एवं जवाहर फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय रंग मल्हार-2026 का भव्य आयोजन 12 जुलाई को संपन्न हुआ। ’’इंदर राजा पानी दो, पानी दो गुड़ धानी दो’’ की लोकभावना पर आधारित इस आयोजन में कलाकारों ने पारंपरिक लकड़ी के संदूकों को कैनवास बनाकर देवराज इंद्र से अच्छी वर्षा, सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की मंगलकामना व्यक्त की।

संस्था सचिव कैलाश पलिया ने बताया कि कार्यक्रम में शहर के 100 से अधिक बाल, युवा एवं वरिष्ठ कलाकारों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतिभागियों ने मधुबनी, गोंड, मिनिएचर, वर्ली सहित विभिन्न भारतीय एवं पारंपरिक चित्र शैलियों के सुंदर समन्वय से आकर्षक कलाकृतियों का सृजन किया। इन कलाकृतियों ने उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

आयोजन की विशेषता यह रही कि इसमें 10 वर्ष से लेकर 90 वर्ष तक की आयु के चित्रकारों ने अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दौरान राज्य स्तरीय कला प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया।

इस अवसर पर वरिष्ठ चित्रकार इकबाल हुसैन ने मॉडल को सामने बैठाकर लाइव पोर्ट्रेट डेमोस्ट्रेशन प्रस्तुत किया, जिसे कलाकारों एवं कला प्रेमियों ने सराहा। इसके बाद युवा कलाकार कैलाश पलिया ने जलरंग चित्रकला का सजीव प्रदर्शन करते हुए प्रतिभागियों को जलरंग तकनीक की बारीकियों से परिचित कराया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पद्मश्री जानकी लाल जी, हाथीभाटा आश्रम के महंत संत दास जी, ओएसडी रजनीश कुमार, लायन पवन पवार, लायन मधु जी, वरिष्ठ मूर्तिकार गोवर्धन सिंह पवार, वरिष्ठ चित्रकार मंजू मिश्रा, डॉ. मनीष रंजन, कथक गुरु रमा पच्चीसिया, रिलायंस मॉल के अंकुश पटवा, मुकेश जी तथा वरिष्ठ चित्रकार इकबाल हुसैन ने सभी प्रतिभागियों को स्मृति-चिन्ह एवं प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले श्रेष्ठ 25 कलाकारों को विशेष सम्मान दिया गया। सम्मानित कलाकारों में सुमित गुर्जर, अनुष्का पाराशर, डॉ. उमा वैष्णव, ज्योति पारीक, दृष्टि जैन, अंकित बेरवा, दिव्या सोनी, सुदर्शन स्वर्णकार, यशस्वी राठौर, भूमि जैन, ममता धनिष्ठा चपलोत, सिया कावड़िया, आभा नैनोटी, भूवी केसवानी, निशा कुमावत, बबलू रेगर, पायल पाटीदार, वेदिका शुक्ला, अनु प्रजापत, झलक रानी, फिरदौस बानो, आर्या माहेश्वरी एवं नीतू कुमावत सहित कुल 25 कलाकार शामिल रहे।

अंतर्राष्ट्रीय रंग मल्हार-2026 का समापन कला, संस्कृति एवं लोक परंपरा के संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित कलाकारों एवं दर्शकों ने इस आयोजन की सराहना करते हुए इसे भीलवाड़ा की कला-संस्कृति के लिए एक प्रेरणादायी पहल बताया।

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