भीलवाड़ा: आचार्य श्रीरामदयालजी महाराज ने सत्संग में बताया समय का महत्व
चातुर्मास सत्संग में आचार्य रामदयालजी महाराज ने स्वरूपाबाई महिला मंडल को सम्मानित कर समय और गुरु के महत्व पर विचार व्यक्त किए।

भीलवाड़ा में चातुर्मास सत्संग के दौरान आचार्य रामदयालजी महाराज की मौजूदगी में सम्मानित महिला मंडल।
भीलवाड़ा, 12 अक्टूबर। समय का चक्र कभी नहीं थमता और जीवन में सुख-दुःख का आगमन भी समय के साथ ही होता है। जो व्यक्ति समय का महत्व समझ लेता है, वह जीवन में सफलता प्राप्त करता है, जबकि समय की कीमत नहीं पहचानने वाले के पास अंत में पछतावा ही रह जाता है। यह विचार अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने सोमवार को ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत आयोजित दैनिक सत्संग में व्यक्त किए।
इस अवसर पर आचार्य रामदयालजी महाराज ने चातुर्मास के दौरान सराहनीय सेवाएं देने पर स्वरूपाबाई महिला मंडल की सदस्यों को उपरना ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। उन्होंने महिला मंडल की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि सदस्यों ने चातुर्मास से जुड़े प्रत्येक कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम सहयोग दिया।
सत्संग में आचार्यश्री ने कहा कि समय का महत्व समझने वाला व्यक्ति जीवन में सफलता प्राप्त करता है, जबकि समय की कीमत नहीं जानने वाले के पास पछतावे के अलावा कुछ नहीं रहता। कभी प्रवचन शुरू होने का समय आता है तो कभी उसके समाप्त होने का। समय का पहिया निरंतर चलता रहता है। उन्होंने कहा कि जिसके मन में राम और गुरु के प्रति अनुराग उत्पन्न हो जाता है, वह संसार के तमाम कार्यों के बीच भी सत्संग में पहुंचता है।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि चातुर्मास की समाप्ति का समय नजदीक आ रहा है। रामस्नेही परंपरा के अनुसार चातुर्मास विजयादशमी को पूर्ण हो जाता है। उन्होंने गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जिनका संपूर्ण जीवन गुरु कृपा से व्यतीत होता है, वे गुरु के वियोग को समझते हैं। शिष्य के जीवन में गुरु का सर्वाधिक महत्व होता है।
आचार्यश्री ने जम्बुश्वर चरित्र की चर्चा करते हुए कहा कि इस चरित्र के माध्यम से कर्तव्यबोध, आत्मकल्याण के पल और मानव शरीर की सार्थकता किसमें है, इसका चिंतन प्राप्त होता है।
आचार्यश्री से पूर्व अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
चातुर्मास के तहत प्रतिदिन सुबह 8.30 से 9 बजे तक रामधुनी के साथ वाणीजी का पाठ हो रहा है। इसके बाद सुबह 9 बजे से दैनिक सत्संग आयोजित किया जा रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती होती है। वहीं, रामस्नेही संप्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा प्रस्तुत भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। समय के महत्व, गुरु के प्रति अनुराग और सत्संग की महत्ता का संदेश इन धार्मिक आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जा रहा है।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara
नाम: राजेश तोषनीवाल
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस
परिचय
राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।
- वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
- इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
