भीलवाड़ा, 27 सितंबर। अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज के 71वें अवतरण दिवस पर आयोजित ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तीन दिवसीय विशेष आयोजन के अंतिम दिन रविवार को माणिक्यनगर स्थित रामद्वारा में विराट संत सम्मेलन हुआ। सम्मेलन में भीलवाड़ा और आसपास के प्रमुख धर्मस्थलों से पहुंचे महन्तों एवं संतों ने आचार्यश्री के दीर्घायु जीवन की मंगलकामना करते हुए सनातन धर्म, राम भक्ति एवं राष्ट्र भक्ति के लिए दी जा रही सेवाओं की अनुमोदना की। इस दौरान रामद्वारा धाम श्रद्धा, आस्था और भक्ति के समागम का साक्षी बना।

संत सम्मेलन में संकटमोचन हनुमान मंदिर के महामंडलेश्वर बाबूगिरी महाराज, पंचमुखी दरबार के महन्त लक्ष्मणदास त्यागी, निम्बार्क आश्रम के महन्त मोहनशरण शास्त्री, हनुमान टेकरी आश्रम के महन्त बनवारीशरण काठियाबाबा, हनुमंत धाम के महन्त रामदास रामायणी, हाथीभाटा आश्रम के महंत संतदास, हरिशेवाधाम के संत मायाराम, सांवलियाधाम मूंगाणा के संत अनुजदास, संत रामपालदास, उज्जैन से आई साध्वी माया देवी, पंचमुखी दरबार के संत परमेश्वरदास, संत सच्चिदानंददास और संत अजयरामदास ने पहुंचकर आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन दिया। आचार्य रामदयालजी महाराज ने सम्मेलन में पधारे सभी संतों के प्रति कृतज्ञता एवं आभार व्यक्त किया।

आशीर्वचन देते हुए आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि हमारा राम अजर, अमर और अविनाशी है और भारत तथा सनातन धर्म को इस संसार में कोई मिटा नहीं सकता। उन्होंने कहा कि हमारा भारत संतों का राष्ट्र है। यहां कितने भी संताप आएं, राम की ताकत और संतों की साधना व त्याग से भारत सदा संताप मुक्त रहेगा। भय और आतंकवाद से भी यह मुक्ति दिलाएगा।


आचार्यश्री ने कहा कि गंगा पापियों का उद्धार करने धरती पर आई, लेकिन गंगा में संतों के स्नान करने से उसे अखंड पावनता प्राप्त हो गई। संतों का जब भी आशीर्वाद मिले, अपने को धन्य मानना चाहिए। संतों के इस पावन आगमन से यह चातुर्मास सार्थक हो गया है।

उन्होंने कहा कि समय का अभाव परिवार, समाज और राष्ट्र को उतना नुकसान नहीं पहुंचाता, जितना समझ का अभाव पहुंचाता है। समझ की कमी होने से व्यक्ति के साथ परिवार, समाज और राष्ट्र बिखर जाता है। संत, सैनिक और शिक्षक तीनों राष्ट्र की धरोहर हैं। संत धर्म के लिए, सैनिक धरती के लिए और शिक्षक शिक्षा के लिए 24 घंटे समर्पित रहकर सेवाएं देता है।

संत सम्मेलन में पंचमुखी दरबार के महन्त लक्ष्मणदास त्यागी ने कहा कि आचार्य रामदयाल महाराज निरन्तर राम और राष्ट्र के प्रति समर्पित रहने का संदेश प्रदान कर रहे हैं। राष्ट्र के प्रति सजगता आवश्यक है। वर्तमान में धर्मान्तरण का खतरा सामने है, जिसके प्रति सजग रहना है। हमें अपना धर्म और संस्थाएं सुरक्षित रखनी हैं। राम नाम का आश्रय लेने से आत्मा निर्मल और पावन हो जाती है।

संकटमोचन हनुमान मंदिर के महामंडलेश्वर बाबूगिरी महाराज ने कहा कि पूज्य आचार्यश्री मानव सेवा और राष्ट्र सेवा की भावना मन में लेकर लोगों को धर्म से जोड़ने का अनुकरणीय कार्य कर रहे हैं। सनातन धर्म एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान अनमोल है। आचार्यश्री का यह चातुर्मास धर्म जागरण की दृष्टि से ऐतिहासिक साबित हो रहा है।

निम्बार्क आश्रम के महन्त मोहनशरण शास्त्री ने कहा कि संत दर्शन भगवत दर्शन है और आचार्य भगवान का ही स्वरूप हैं। सत्संग के अमृत में डुबकी लगाने से जीवन धन्य हो जाता है। संतों के श्रीमुख से निकलने वाली वाणी हरि जल है और इसमें डुबकी लगाए बिना मन निर्मल नहीं होगा। हरि सुमिरन के बिना आत्मा पावन नहीं हो सकती।

हरिशेवाधाम के संत मायाराम ने कहा कि संतों की सत्संग से जीवन पवित्र एवं पावन बनता है। राम नाम जपने से भवसागर पार हो सकते हैं। हनुमंत धाम के महन्त रामदास रामायणी ने कहा कि राम की भक्ति जीवन का कल्याण करती है। आचार्य रामदयाल महाराज निरन्तर राम भक्ति और राष्ट्र भक्ति के लिए जागृति उत्पन्न कर रहे हैं।

सांवलियाधाम मूंगाणा के संत अनुजदास ने कहा कि अज्ञान से ज्ञान की तरफ ले जाने वाले संतों के आगमन से जीवन में प्रकाश पुंज प्रज्वलित होता है। हमारे भीतर की विकृतियां मिटाने का मार्ग संत बताते हैं। कलिकाल में संत रूप में भगवान संस्कारों की गंगा प्रवाहित करते हैं। जब तक भगवान पर भरोसा नहीं होगा, मानव का कल्याण नहीं होगा।

मूंगाणा के संत रामपाल दास ने भजन की प्रस्तुति दी। समारोह में संत प्रीतमराम महाराज ने भजन के माध्यम से वहां पधारे संतों का अभिनंदन किया। मंच संचालन रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने किया। सम्मेलन में पधारे संतों का आचार्यश्री ने शाल ओढ़ाकर अभिनंदन किया।

चातुर्मास आयोजन का लाभ प्राप्त करने वाले भंवरलाल अशोककुमार अजमेरा परिवार, मुरलीजी कल्याणमल ईनाणी परिवार एवं लालचंद, शिवकुमार अशोककुमार, मुकेशकुमार गगरानी परिवार ने सभी संतों का स्वागत-सम्मान किया।

विश्व शांति कल्याण चातुर्मास के तहत आचार्य रामदयालजी महाराज के सानिध्य में एक पखवाड़े चलने वाले सवा छतीस हजार अनुभव वाणीजी के सामूहिक पाठ का शुभारंभ रविवार दोपहर 2 बजे रामद्वारा धाम में हुआ। शाम 5 बजे तक हुए सामूहिक पाठ में वाणीजी पाठ करने वाले पाठकों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी वाणीजी पाठ करने पहुंचे।

वाणीजी का सामूहिक पाठ सोमवार सुबह 7 बजे से रामद्वारा धाम में नियमित होगा। इसके माध्यम से महाप्रभु स्वामी रामचरणजी महाराज द्वारा रचित अनुभव वाणी के सवा छतीस हजार पाठ की साधना हो रही है। इससे परमात्मा की भक्ति के साथ सर्व मंगल व सुख शांति की कामना की जाएगी।


Anshul Toshniwal, Bhilwara

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नाम: अंशुल तोषनीवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): सभी प्रकार के समाचार (General Reporting)

अनुभव: 6 माह

परिचय 

अंशुल तोषनीवाल भीलवाड़ा जिले से न्यूज़ वेबसाइट के लिए रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह भीलवाड़ा जिले और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की स्थानीय घटनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों, क्राइम, राजनीति और जनहित से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

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अंशुल तोषनीवाल शैक्षणिक रूप से इंजीनियर (Engineer) हैं। उनकी तकनीकी और विश्लेषणात्मक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों को सटीकता से समझने और प्रस्तुत करने में मदद करती है।

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