भीलवाड़ा, 13 अक्टूबर। परमात्मा की प्राप्ति के मार्ग में माया को सबसे बड़ी बाधा बताते हुए अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय, शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने कहा कि दया, शील, संतोष और सत्य के प्रति समर्पण का भाव रखने वाले साधक को राम तक पहुंचने में कोई बाधा नहीं आती। उन्होंने कहा कि इन चार गुणों का साधक के जीवन में विशेष महत्व है। इसी बीच, चातुर्मासिक आयोजन के तहत आसोज शुक्ल पंचमी, 15 अक्टूबर गुरुवार को सुबह 9 बजे माणिक्यनगर रामद्वारा धाम से पंचमी गोटकाजी महाराज की शोभायात्रा निकाली जाएगी।

आचार्यश्री ने मंगलवार को ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत आयोजित दैनिक सत्संग में कहा कि प्रत्येक साधक की इच्छा राम रूपी परमात्मा की प्राप्ति की होती है। दया स्वभाव, शील का संकल्प, संतोष की वृत्ति और सत्य के प्रति समर्पण ऐसे गुण हैं, जिनका रामचरण अनुरागी के जीवन से गहरा संबंध है। जिस व्यक्ति में ये चारों गुण आ जाते हैं, उसके लिए परमात्मा तक पहुंचने का मार्ग सुगम हो जाता है।

सत्संग में आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि अनुभवी महापुरुषों ने राम के दर्शन नहीं हो पाने के पीछे माया को सबसे बड़ी बाधा बताया है। माया ऐसी तलवार है, जिससे कटे बिना कोई नहीं रहता। साधना के मार्ग में माया सबसे बड़ी रुकावट है। यह साधक को भटकाती है और गृहस्थ व्यक्ति को साधना से जुड़ने नहीं देती।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में सिनेमा, सिगरेट, सट्टा, सुरा और सुंदरी से जुड़े अपसंस्कारों के बढ़ने से सत्संग, सदाचार, सद्भावना और शांति प्रभावित हुई है। सिनेमा और मोबाइल के दुष्प्रभाव से समाज व्यथित है। आज कोई भी व्यक्ति दिल पर हाथ रखकर यह नहीं कह सकता कि वह पूरी तरह सुखी है। परमात्मा की प्राप्ति के लिए मीरा, ध्रुव और प्रह्लाद जैसी भक्ति आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति में डूबा युवा सांसारिक सुख पाने की चाह में भोग-वासनाओं के जाल में उलझकर धर्म के मार्ग से विमुख होता जा रहा है। इंद्रियों पर संयम रखे बिना परमात्मा की साधना संभव नहीं है।

आचार्यश्री ने वासना के दुष्प्रभावों पर बोलते हुए कहा कि वासना व्यक्ति को भटकाव के रास्ते पर ले जाती है। इसके कारण व्यक्ति अपनी विकृतियों और संस्कृति पर चिंतन नहीं कर पाता। वासना की पूर्ति के लिए व्यक्ति उपासना के चारों तत्वों का अनादर करने से भी नहीं हिचकता। उन्होंने कहा कि माता-पिता बच्चों को पढ़ाई और व्यवसाय के लिए बाहर भेजते हैं, लेकिन कई बार बच्चे उनकी आंखों में भी धूल झोंकते हैं। दुनिया में दूसरों की आंखों में धूल झोंकी जा सकती है, लेकिन परमात्मा से कुछ भी छिपाया नहीं जा सकता।

बच्चों के पालन-पोषण और संस्कारों पर आचार्यश्री ने कहा कि पांच वर्ष की उम्र तक बच्चों का पालन-पोषण करना चाहिए और 10 वर्ष की उम्र तक गलत कार्य करने पर उन्हें ताड़ना देनी चाहिए। एक उम्र के बाद बच्चों के साथ मित्रवत व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि माता-पिता इकलौती संतान के मोह में कई बार उसके गलत आचरण को भी स्वीकार कर लेते हैं।

आचार्यश्री से पहले अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के समापन पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन सुबह 8:30 से 9 बजे तक रामधुनी के साथ वाणीजी का पाठ किया जा रहा है। दैनिक सत्संग सुबह 9 बजे से आयोजित हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती होती है। इसके साथ ही रामस्नेही संप्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा सुनाई जा रही है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। 15 अक्टूबर को माणिक्यनगर रामद्वारा धाम से निकलने वाली पंचमी गोटकाजी महाराज की शोभायात्रा चातुर्मास के प्रमुख आयोजनों में शामिल है।

Anshul Toshniwal, Bhilwara

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नाम: अंशुल तोषनीवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा जिला (राजस्थान)

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अनुभव: 6 माह

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अंशुल तोषनीवाल भीलवाड़ा जिले से न्यूज़ वेबसाइट के लिए रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह भीलवाड़ा जिले और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की स्थानीय घटनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों, क्राइम, राजनीति और जनहित से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

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अंशुल तोषनीवाल शैक्षणिक रूप से इंजीनियर (Engineer) हैं। उनकी तकनीकी और विश्लेषणात्मक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों को सटीकता से समझने और प्रस्तुत करने में मदद करती है।

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