माणिक्यनगर स्थित रामद्वारा में ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत आयोजित विराट श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के दूसरे दिन सोमवार को सत्संग, भक्ति और जीवन मूल्यों पर गहन प्रवचन हुए। अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने वाणीजी प्रवचन में कहा कि जीवन में संग्राम नहीं, संग राम चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में कितना भी संकट हो, राम का संग बना रहना चाहिए।

आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि सत्संग में जो सुख है, वह कहीं भी नहीं है। सत्संग में सुख मिलना अनंत जन्मों का पुण्य है, जबकि सत्संग में किसी को दुःख होता या मिलता है तो यह कई जन्मों के प्रबल पाप का परिणाम होता है। अपने अहम की तुष्टि दुःख प्रदान करती है और अपने ज्ञान से अहंकार का दमन करना सुखप्रदाता होता है। उन्होंने कहा कि जिसे सत्संग में सुख नहीं मिले, समझना चाहिए कि उसका ज्ञान और विवेक जागृत नहीं हुआ है।

गणेश चतुर्थी के अवसर पर आचार्य रामदयालजी महाराज ने सभी को पर्व की बधाई देते हुए राष्ट्र में समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि भादवा सुदी चतुर्थी को ब्रह्म गजानंद के रूप में प्रकट होकर धरती पर एक अद्भुत इतिहास की रचना करते हैं, इसलिए गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। भगवान गजानंद मुक्ति प्रदाता हैं और सभी के दुःख दूर करते हैं।



उन्होंने कहा कि गणेश चतुर्थी के माध्यम से देश-दुनिया को स्वामी रामचरण महाराज यही संदेश देते हैं कि जिसके जीवन में संग्राम नहीं, संग राम है, उसके लिए यह पर्व मनाना सफल है। संग्राम में गजानंद के संग राम थे। जीवन में राम और गुरू का संगम चाहिए। संग्राम होना बहुत आसान है, लेकिन जीवन में राम का संग होना बहुत मुश्किल है। इसलिए जीवन में कितना भी संकट हो, संग राम रहना चाहिए।

आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि भगवान गणेश का जीवन सिखाता है कि जीवन में धैर्य बहुत महत्वपूर्ण है और आवेश में आकर कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए। राम नाम की साधना करने से गजानंद जगत पूज्य हो गए। हमारे समक्ष राम, राष्ट्र और रोटी का विषय है, लेकिन गणेश चतुर्थी बताती है कि तीनों में राष्ट्र धर्म सर्वोपरि है। हमारे भीतर पहले अनुशासन और फिर शासन की भावना होनी चाहिए। दूसरों को कुछ भी कहने से पहले अपने भीतर अवश्य झांक लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संत वह होता है जो दूसरों के संताप का अंत करे। समस्याओं को पैदा करने वाला शैतान होता है और उनका समाधान करने वाला भगवान होता है। जिसके समक्ष बैठकर मन को शांति मिले, वह संत होता है। जीवन में साधन नहीं, साधना प्रबल होनी चाहिए। आचार्यश्री ने कहा कि महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज की भक्ति विलक्षण थी और उनके प्रति श्रद्धा, आस्था एवं विश्वास अडिग होना चाहिए।

भागवत ज्ञान सप्ताह के दूसरे दिन व्यास पीठ से संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना ने विभिन्न प्रसंगों का वाचन किया। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण कहकर गए कि जब तक मेरे शब्द शास्त्र के रूप में भागवत का वाचन होगा, तब तक समझना कि धर्म की अधर्म से लड़ाई बंद नहीं हुई और सुविचारों का कुविचारों से संघर्ष अनवरत चलता रहेगा।

संत मनोरथराम ने कहा कि हमारी संस्कृति सिखाती है कि गुरू के चरणों में समर्पित भाव से रहना चाहिए। उन्होंने बलराम-कृष्ण संवाद, राजा जनक, कश्यप ऋषि और करदम ऋषि आदि प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि अहंकार को जीवन से विसर्जित करने के लिए गुरू की आवश्यकता होती है।

उन्होंने भक्ति कर भागवत कृपा प्राप्त करने में विलंब नहीं करने का आग्रह किया। संत मनोरथराम ने कहा कि दुनिया की खुशियां और सौगातें कम नहीं होंगी, लेकिन हमारी श्वास की कड़ी कब टूट जाएगी, यह नहीं जानते। जीवन में भगवान और मौत को कभी नहीं भूलना चाहिए। मौत किसी को नहीं छोड़ने वाली और भगवान की कृपा ही जीवन को सार्थक बनाने वाली है। इसलिए जीवन में हर पल भगवान नाम का स्मरण करते रहें और अपनी श्वासों का हिसाब रखें।

संत मनोरथराम ने कहा कि भागवत उसी की महिमा गाता है, जिसे परमात्मा कहा गया है। मन को निगरानी में और इन्द्रियों को वश में रखना चाहिए। हर मसले पर बुद्धि का उपयोग करते हुए सामने वाले की भावना को भी समझना चाहिए। अपनी वाणी और व्यवहार पर संयम रखना चाहिए।

श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कई भजनों ने वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। चातुर्मास आयोजन समिति के अनुसार 20 सितम्बर तक चलने वाले श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह में प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा होगी। सुबह 10.30 बजे से 11.30 बजे तक एवं शाम को 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन होगा। आयोजन में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भीलवाड़ा पहुंचे हैं।

श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के तहत पुष्कर से आए विद्वान पंडितों द्वारा रामद्वारा परिसर में 108 भागवत का मूल पाठ किया जा रहा है। सुबह पाठ प्रारंभ करने से पूर्व 108 यजमान परिवारों द्वारा विद्वान पंडितों का पूजन किया गया। पूजा-अर्चना के बाद विद्वानों ने भागवत का मूल पाठ किया तो पूरा वातावरण मंत्रों से पावन एवं पवित्र हो गया।

जहां मूल भागवत पाठ चल रहा था, उस पावन नजारे के बाहर से ही सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। दुनिया के कई देशों में रहने वाले श्रद्धालुओं की भावना के अनुरूप मूल भागवत के ऑनलाइन पूजन की भी व्यवस्था की गई है। इस प्रकार रामद्वारा में चल रहा भागवत ज्ञान सप्ताह सत्संग, प्रवचन, मूल भागवत पाठ और भक्ति आयोजनों के साथ 20 सितम्बर तक जारी रहेगा।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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