रायला में रेलवे की दीवार के विरोध में ग्रामीणों का कलेक्ट्रेट घेराव, आम रास्ते बहाल करने की मांग
भीलवाड़ा के रायला क्षेत्र में रेलवे द्वारा आबादी क्षेत्र में दीवार बनाकर आम रास्ते बंद किए जाने के विरोध में ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने जनजीवन प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए जल्द कार्रवाई नहीं होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी।

तस्वीर में भीलवाड़ा के कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन करते हुए ग्रामीण नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा। रायला क्षेत्र में रेलवे प्रशासन द्वारा आबादी क्षेत्र में दीवार बनाकर आम रास्तों को बंद किए जाने के विरोध में गुरुवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण और क्षेत्रवासी कलेक्ट्रेट पहुंचे। आक्रोशित ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया, जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर जिला मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा।
ग्रामीणों का आरोप है कि रेलवे विभाग असंवैधानिक तरीके से दीवार खड़ी कर सार्वजनिक रास्तों को बंद कर रहा है, जिससे खेड़ा रायला की लगभग 5,000 की आबादी का जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
जिला मजिस्ट्रेट को सौंपे गए ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रेलवे अधिकारियों की धौंस, रेलवे पुलिस (RPF) द्वारा झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकियों और स्थानीय प्रशासन की अनदेखी के कारण करीब 5,000 लोगों की आबादी नजरबंद और जेल जैसी स्थिति में जीवन जीने को मजबूर है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि अजमेर-चित्तौड़गढ़ दोहरीकरण परियोजना के तहत रायला राजस्व क्षेत्र की सार्वजनिक भूमि और आम रास्तों की आराजी नंबर 646, 643, 644, 345, 730, 739, 770, 1117, 1087, 1088, 1089, 1254, 1258 एवं 1259 पर असंवैधानिक तरीके से दीवार बनाकर कब्जे की कार्रवाई की जा रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि दीवार निर्माण के कारण स्कूल जाने वाले बच्चे, मजदूर, अस्पताल जाने वाले मरीज और प्रसूता महिलाएं जान जोखिम में डालकर एक-दूसरे की छतों, खेतों और कंटीली झाड़ियों से होकर गुजरने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रास्ते बंद होने के कारण क्षेत्र में पीने के पानी के टैंकर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे मामले से सांसद, विधायक, रेलवे के उच्च अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन को समय-समय पर अवगत कराया गया, लेकिन आज तक जनहित में कोई निर्णय नहीं लिया गया।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही अवैध रूप से बनाई जा रही दीवार का निर्माण नहीं रोका गया और आम रास्तों को बहाल नहीं किया गया, तो क्षेत्रवासी उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में उत्पन्न होने वाले सभी हालात की जिम्मेदारी रेलवे विभाग और स्थानीय प्रशासन की होगी।

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