सनातन सेवा समिति, हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन के सानिध्य में पुरुषोत्तम मास महोत्सव के अंतर्गत ज्योतिर्मठ अवांतर भानपुरा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ द्वारा आयोजित भक्तमाल कथा के तीसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और संत महिमा की अविरल धारा प्रवाहित हुई। कथा के दौरान स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने कहा कि संत महापुरुष इस धरती पर मानवता के कल्याण और धर्म की रक्षा के लिए अवतरित होते हैं। उन्होंने कहा कि संतों का जीवन त्याग, तपस्या, सेवा और ईश्वर भक्ति का जीवंत उदाहरण है तथा वर्तमान समय में समाज को संतों के आदर्शों और सनातन संस्कृति के मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है।

कथा प्रसंगों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि सच्चा भक्त वही है जो अहंकार त्यागकर प्रभु चरणों में पूर्ण समर्पण भाव रखता है। स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ ने भागवत धर्म के बारह महान आचार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रह्माजी, देवर्षि नारद, भगवान शंकर, सनत्कुमार, कपिलदेव, स्वायंभुव मनु, प्रह्लाद, जनक, भीष्म पितामह, बलि, शुकदेवजी और धर्मराज—ये बारह महापुरुष ही भागवत धर्म के वास्तविक रहस्य को जानते हैं।

उन्होंने श्रीमद्भागवत का प्रसिद्ध श्लोक उद्धृत करते हुए कहा—

“स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे।

अहैतुक्यप्रतिहता ययात्मा सम्प्रसीदति॥”

अर्थात् मनुष्यों के लिए वही धर्म सर्वोत्तम है जिससे भगवान के प्रति निष्काम, निरंतर और अखंड भक्ति उत्पन्न हो। ऐसी भक्ति में किसी प्रकार की सांसारिक कामना नहीं होती और न ही कोई बाधा उसे रोक सकती है। इस प्रकार की निर्मल भक्ति से जीव का हृदय परमात्मा की अनुभूति से पूर्ण संतोष और आनन्द को प्राप्त कर कृतार्थ हो जाता है।

उन्होंने कहा कि भागवत धर्म केवल कर्मकाण्ड नहीं, बल्कि भगवान के प्रति प्रेम, समर्पण और निष्काम भक्ति का मार्ग है, जो मानव जीवन को शांति, संतोष और मोक्ष की ओर ले जाता है। कथा के दौरान अनेक संत महात्माओं के प्रेरणादायी प्रसंग भी सुनाए गए, जिनमें विपरीत परिस्थितियों में भी भगवान का स्मरण न छोड़ने वालों पर अंततः प्रभु कृपा होने का उल्लेख किया गया।

कथा के मध्य श्रद्धालुओं द्वारा “हरि नाम” और “जय श्रीराम” के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। समापन पर आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया।

आज विष्णु यज्ञ में सुनीता गुरनानी, मुस्कान, अजय गुरनानी और बड़ौदा के यजमान ने आहुतियाँ दीं तथा महादेव का रुद्राभिषेक किया गया। पुरुषोत्तम माह महोत्सव के अंतर्गत आश्रम में प्रतिदिन विष्णु यज्ञ, रुद्राभिषेक, संकीर्तन, गंगा आरती एवं विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हो रहे हैं।

आश्रम के संत मायाराम और संत गोविन्दराम ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे पुरुषोत्तम मास में भीलवाड़ा में बह रही धर्मगंगा की त्रिवेणी का लाभ अवश्य लें। यह आयोजन सनातन संस्कृति, भक्ति परंपरा और आध्यात्मिक चेतना के संवर्धन का सशक्त माध्यम बनता जा रहा है।

Pratahkal Bureau

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