भीलवाड़ा: राष्ट्र संत पुलकसागरजी के सानिध्य में उत्तम तप धर्म की पूजन
दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन सूर्यमहल में श्रद्धालुओं ने भगवान का अभिषेक किया, आचार्य ने दिए आध्यात्मिक जीवन में तप के संदेश।

तस्वीर में भीलवाड़ा के शास्त्रीनगर में भगवान का अभिषेक करते श्रद्धालु दिख रहे हैं।
भीलवाड़ा, 22 सितंबर। भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में दशलक्षण (पर्युषण) महापर्व की धर्म आराधना के सातवें दिन मंगलवार को उत्तम तप धर्म की पूजन और आराधना हुई। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मेन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में आयोजित कार्यक्रम में भगवान के अभिषेक और भक्ति के दौरान श्रावक-श्राविकाएं झूम उठे तथा नाचते-गाते हुए भक्ति में शामिल हुए।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने उत्तम तप धर्म का संदेश देते हुए कहा, “जो तपता नहीं वह पकता नहीं है।” उन्होंने कहा कि सोना तपने के बाद निखरता है, उसी तरह आत्मा तपने के बाद परमात्मा बनती है। जीवन को निखारना है तो तपना पड़ेगा। महावीर दर्शन न भोग का, न योग का, वह तो उपयोग का दर्शन है।
आचार्यश्री ने कहा कि शरीर और भीतर दोनों तरह की तपस्या होती है। मोक्ष का अधिकारी वही बनता है, जो भीतर से तपता और बाहर से भी तपने का प्रयास करता है। तपस्वी की अनुमोदना करने से भी पुण्य मिलता है। दशलक्षण पर्व के दौरान जो दस दिन की उपवास तपस्या कर रहे हैं, उनका अभिनंदन होना चाहिए। तपस्या से काया और आत्मा दोनों निर्मल व पावन बनते हैं। उन्होंने कहा कि तपस्या से जीवन का कल्याण होता है। शरीर और आत्मा दोनों को तपाने पर ही मुक्ति का मार्ग खुलेगा।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि निश्चय और व्यवहार दोनों की साधना करने पर आत्मा परमात्मा में बदल जाती है। आत्मा यदि शुद्ध हो जाए तो वह सिद्धालय में विराजमान हो जाती है और उसे फिर जन्म नहीं लेना पड़ता। तपस्या करने के लिए शरीर से अधिक मन की ताकत जरूरी है। मन मजबूत कर लिया तो तपस्या सहजता से हो जाती है और मन कमजोर हुआ तो तप मार्ग पर नहीं चल सकते। तप की साधना जीवन को आनंदमय और सुखी बनाती है। जो तप का संकल्प करता है, वह सफल भी होता है।
उन्होंने कहा कि यहां पर्युषण में धर्म आराधना का जो ऐतिहासिक माहौल बना है, उसके कारण भीलवाड़ा चातुर्मास की चर्चा पूरे देश में हो रही है और चातुर्मास समिति की समर्पित भाव से दी जा रही सेवाओं से ऐसा हो पाया है।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि पर्युषण में आयोजित पाप नाशनम् शिविर में शामिल सैकड़ों श्रद्धालु प्रातःकाल से लेकर रात्रि तक परमात्मा की पूजा-अर्चना और भक्ति में समर्पित हैं। पर्युषण के सातवें दिन चक्रवर्ती बनकर भगवान का अभिषेक करने का सौभाग्य संतकुमार, विपुल, अतुल पाटनी परिवार ने प्राप्त किया। शांतिधारा का सौभाग्य पारस, खुश्बू जैन इन्दौर ने प्राप्त किया। सांयकालीन महाआरती का सौभाग्य श्री पार्श्वनाथ महिला मण्डल शास्त्रीनगर ने प्राप्त किया।
दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन बुधवार को उत्तम त्याग धर्म की आराधना होगी। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा के अनुसार पाप नाशनम शिविर एवं पर्युषण की दस दिवसीय आराधना अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर 25 सितम्बर को पूर्ण होगी।
इस दौरान प्रतिदिन सुबह 5.30 से 6.30 बजे तक योग ध्यान एवं आचार्य भक्ति हो रही है। सुबह 7 बजे से भगवान का अभिषेक, शांतिधारा व दशलक्षण धर्म पूजन हो रहा है। सुबह 9.15 से 10.15 बजे तक आचार्य पुलकसागर महाराज के प्रवचन हो रहे हैं। शाम 4 बजे से धार्मिक कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। शाम 5.30 से 6.30 बजे तक प्रतिक्रमण एवं ध्यान साधना का आयोजन होता है। शाम 6.30 बजे आरती के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से परमात्मा की भक्ति हो रही है।

Anshul Toshniwal, Bhilwara
नाम: अंशुल तोषनीवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा जिला (राजस्थान)
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परिचय
अंशुल तोषनीवाल भीलवाड़ा जिले से न्यूज़ वेबसाइट के लिए रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह भीलवाड़ा जिले और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की स्थानीय घटनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों, क्राइम, राजनीति और जनहित से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
अंशुल तोषनीवाल शैक्षणिक रूप से इंजीनियर (Engineer) हैं। उनकी तकनीकी और विश्लेषणात्मक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों को सटीकता से समझने और प्रस्तुत करने में मदद करती है।
