आचार्य पुलकसागर का विद्यार्थियों को संदेश: डॉक्टर-इंजीनियर बनो या न बनो, अच्छे इंसान जरूर बनना
भीलवाड़ा के चित्रकूटधाम में ज्ञान गंगा महोत्सव के दौरान आचार्य पुलकसागर ने विद्यार्थियों को अच्छे इंसान बनने, माता-पिता का सम्मान करने और आत्महत्या से दूर रहने का संकल्प दिलाया। प्रवचन में कर्म और मानवीयता का संदेश दिया।

तस्वीर में राष्ट्र संत पुलकसागर महाराज भीलवाड़ा के चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव के दौरान मंच पर प्रवचन देते हुए नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा, 25 अगस्त। जिंदगी में डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, अधिकारी आदि कुछ भी बन सको या नहीं बन सको, लेकिन एक सच्चे और अच्छे इंसान जरूर बनना। कुछ भी बन गए, लेकिन इंसानियत के गुण नहीं आए तो सब बेकार हो जाएगा। अक्षर की पढ़ाई से जिंदगी महान नहीं बनती, बल्कि जिंदगी की पढ़ाई में अव्वल आने का लक्ष्य रखना चाहिए। जिंदगी कागजों में नहीं, इंसानियत में अच्छे नंबर लाने का नाम है। जिंदगी की हकीकत पढ़ाई नहीं, बल्कि इंसानियत और मानवीयता है। ये विचार भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने मंगलवार को चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में विद्यार्थी जीवन पर केंद्रित प्रवचन के दौरान व्यक्त किए।
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में भीलवाड़ा के विभिन्न स्कूलों में प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक के हजारों बच्चे मौजूद रहे। आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि बच्चे अपने शिक्षकों का सम्मान करें और शिक्षक बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ जिंदगी का ज्ञान भी प्रदान करें।
प्रवचन के अंत में आचार्यश्री ने बच्चों से हाथ खड़े करवाकर संकल्प कराया कि कैसी भी परिस्थिति आए, वे कभी आतंकवादी और देशद्रोही नहीं बनेंगे तथा राष्ट्र से गद्दारी नहीं करेंगे। उन्होंने बच्चों को यह संकल्प भी दिलाया कि जीवन में कितनी भी असफलताएं आएं, लेकिन वे कभी आत्महत्या नहीं करेंगे और मरते दम तक अपने माता-पिता का सम्मान करेंगे।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जिंदगी बेहद अनमोल है। परीक्षा में कभी नंबर कम भी आएं तो तनाव में आकर निराश और हताश नहीं होना चाहिए। एक असफलता हजार सफलताओं के द्वार खोलती है। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्महत्या से दूर रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि फांसी का फंदा लगाकर, जहर खाकर या पहाड़ से कूदकर जान नहीं देनी चाहिए, क्योंकि यह जिंदगी दोबारा नहीं मिलने वाली। आत्महत्या के अंधे कुएं में कभी छलांग नहीं लगानी चाहिए, क्योंकि फांसी पर बच्चा अकेला नहीं लटकता, पूरे परिवार की खुशियों को फंदा लग जाता है।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति की वैल्यू डिग्री से नहीं, गुणों से होती है। जिंदगी में बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता। पढ़ाई के जो 10-12 साल मिले हैं, उनमें अच्छा पढ़ लिया तो जिंदगी भर मौज-मस्ती कर सकेंगे, लेकिन पढ़ाई का वक्त मौज-मस्ती में गंवा दिया तो पूरी जिंदगी परेशानियों में बीत सकती है।
माता-पिता के सम्मान की प्रेरणा देते हुए आचार्यश्री ने कहा कि गई हुई दौलत और शोहरत वापस आ सकती है, लेकिन माता-पिता चले गए तो कभी लौटकर वापस नहीं आएंगे।
व्यक्ति जन्म से नहीं, कर्म से बनता है महात्मा और महापुरुष
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि इस धरती पर कोई महापुरुष के रूप में पैदा नहीं हुआ। महावीर, गौतम बुद्ध, स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी ये नाम उनके जन्म से नहीं थे। दुनिया उन्हें शुरुआत में वर्धमान, सिद्धार्थ, नरेंद्र और मोहनदास के नाम से जानती थी। ये सभी साधारण इंसान के रूप में जन्मे थे और अपने कार्यों से महापुरुष व महात्मा का दर्जा प्राप्त किया। इंसान को जन्म से नहीं, कर्म से महान बनना पड़ता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि महापुरुषों जैसे कार्य शुरू कर दो, तुम्हारा नाम भी उस सूची में आ जाएगा। अपनी जिंदगी यूं ही पूरी नहीं कर लेना, बल्कि जीवन में कुछ ऐसे काम कर लेना कि दुनिया तुम्हें जानने लगे। जीवन में ऊपर उठने के लिए रंग-रूप की नहीं, हौसलों की जरूरत होती है। गरीबी को कभी अपनी कमजोरी या बाधा नहीं मानना चाहिए।
आचार्यश्री ने कहा कि मिसाइल मैन एपीजे अब्दुल कलाम और हमारी वर्तमान राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू कोई अमीर घर में जन्मे नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपने संकल्प और हौसलों से ऊंचाइयों को हासिल किया।
दुनिया नाम से नहीं, काम से जानती है
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि दुनिया में कई लोग जन्म लेकर चले जाते हैं, लेकिन उन्हें अधिकतर लोग नहीं जानते। वहीं कुछ लोग ऐसा काम करते हैं कि दुनिया उन्हें जाने के बाद भी याद करती है। कल्पना चावला, सुनीता विलियम्स और इंदिरा गांधी को दुनिया उनके काम से जानने लगी।
उन्होंने कहा कि दुनिया राम और रावण, कृष्ण और कंस, अच्छे और बुरे दोनों कार्य करने वालों को जानती है, लेकिन अच्छे कार्य करने वालों के मंदिर बनाए जाते हैं और बुरे कार्य करने वालों के पुतले जलाए जाते हैं। गुमनाम जिंदगी नहीं जीनी चाहिए। ऐसे अच्छे कार्य करने चाहिए कि इतिहास आपको याद करे और लोग मंदिर बनाएं।
आचार्यश्री ने कहा कि जीवन डिग्रियों से नहीं, गुणों से महान बनता है। कबीर, रैदास और मीरा किसी स्कूल में नहीं गए, लेकिन उन महापुरुषों पर पढ़े-लिखे लोग पीएचडी करते हैं। प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने विद्यार्थियों से संवाद भी किया और उनके मन की बात जानी। कई मार्मिक प्रसंगों के दौरान विद्यार्थी भावुक भी नजर आए।
दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन और मंगलाचरण से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
प्रवचन से पूर्व दीप प्रज्वलन, आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य निहालचंदजी, ललित, पवन और लोकेश अजमेरा परिवार ने प्राप्त किया। विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों ने भी आचार्यश्री को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह सहित अन्य पदाधिकारियों ने किया। जैन ज्योति कॉलोनी महिला मंडल की सदस्यों ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह ने किया।
भीलवाड़ा शहर एवं आसपास के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने के लिए चित्रकूटधाम पहुंचे। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन जारी रहेगा। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।

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