भीलवाड़ा में गैर-सरकारी निजी विद्यालयों के खिलाफ दमनकारी नीतियों, प्रशासनिक प्रताड़ना और राइट टू एजुकेशन (आरटीई) के तहत अटके भुगतानों के त्वरित समाधान की मांग को लेकर बुधवार 15 जुलाई 2026 को जिले के सभी निजी स्कूल पूरी तरह बंद रहे। भीलवाड़ा जिला निजी स्कूल संघर्ष समिति के आह्वान पर आयोजित इस एक दिवसीय सांकेतिक आंदोलन के तहत जिले के 14 ब्लॉकों एवं उपखंड स्तर पर ज्ञापन सौंपे गए। इसके बाद संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर भीलवाड़ा को भी ज्ञापन सौंपा।

संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि राजस्थान के सामाजिक और शैक्षणिक विकास में निजी स्कूलों का योगदान अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा विभाग और सरकार द्वारा गैर-सरकारी शिक्षण संस्थाओं के प्रति अपनाए जा रहे दमनकारी रवैये को तुरंत प्रभाव से बंद नहीं किया गया, तो राज्य की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था चरमरा जाएगी।

निजी स्कूल संचालकों ने चेतावनी देते हुए कहा कि आगामी 10 दिवस तक राजशाला संबलन निरीक्षण व्यवस्था के तहत किसी भी निजी स्कूल का निरीक्षण नहीं किया जाएगा। साथ ही बिना किसी शर्त के अगले 10 दिनों में मांगों का समाधान नहीं होने पर पूरे राजस्थान में उग्र आंदोलन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में निजी स्कूल संघर्ष समिति ने 13 सूत्रीय मांग पत्र प्रस्तुत किया। इसमें राजशाला संबलन निरीक्षण व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से पूरी तरह निरस्त करने, आरटीई के अंतर्गत पूर्व की प्रवेश प्रक्रिया को पुनः लागू करने ताकि जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा पहुंच सके, ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ के बिना टीसी जारी करने की बाध्यता हटाने के आदेश जारी करने की मांग की गई।

ज्ञापन में आरटीई के तहत प्री-प्राइमरी कक्षाओं (पीपी3$, पीपी4$, पीपी5$) के भुगतान की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने, किसी भी एक या अधिक कक्षा में नॉन-आरटीई स्टूडेंट्स नहीं होने के आधार पर भुगतान रोकने के अवैध प्रतिबंध को हटाने, सत्र 2018, 2019 एवं 2020 में विभिन्न तकनीकी कारणों से रोके गए भुगतानों को अविलंब जारी करने की मांग भी शामिल रही।

संघर्ष समिति ने कोविड काल (सत्र 2020 व 2021) में ऑफलाइन शिक्षण कार्य कराने वाले स्कूलों को बिना किसी शर्त के भुगतान करने, कोविड काल में दोहरे नामांकन के नाम पर की जा रही प्रशासनिक प्रताड़ना को समाप्त कर समस्या का समाधान करने, आरटीई के तहत हर साल सत्र समाप्त होने से पहले दोनों किश्तों का शत-प्रतिशत भुगतान सुनिश्चित करने की मांग रखी।

इसके अलावा आरटीई के अंतर्गत यूनिट कॉस्ट में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत की वृद्धि करने के स्टैंडिंग ऑर्डर जारी करने, पुस्तकों हेतु दी जाने वाली राशि सीधे अभिभावकों के खाते में ट्रांसफर करने तथा राशि 1000 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये प्रति विद्यार्थी निर्धारित करने की मांग की गई।

ज्ञापन में बार-बार जांच और औचक निरीक्षण के नाम पर शिक्षण संस्थानों की प्रताड़ना तुरंत बंद करने तथा गैर-सरकारी विद्यालयों से संबंधित किसी भी नीति या योजना बनाने से पहले पंजीकृत संगठनों से विचार-विमर्श और व्यावहारिक सुझाव लेने की मांग भी रखी गई।

संघर्ष समिति ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री महोदय इस मांग पत्र पर गंभीरता और सकारात्मक रुख अपनाते हुए इसका त्वरित एवं न्यायपूर्ण निस्तारण करेंगे।

ज्ञापन सौंपने के दौरान पंकज प्रजापत, अर्जुन देवलिया, राजीव जैन, डॉ. देबीलाल साहू, करणदीवान कटारिया, बीएल तोलम्बिया, बृजमोहन शर्मा, अजय भण्डारी, विक्रम सिंह, सुधीर शर्मा, महेन्द्र शर्मा, पूरण जोशी, रामगोपाल शर्मा, चन्द्रप्रकाश, शांतिलाल जैन, विजेश पहाड़िया, वीणा जोशी, मधु मारू, मानसी नुवाल, निशा सिखवाल सहित भीलवाड़ा जिले के सैकड़ों स्कूल संचालक व प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

Anshul Toshniwal, Bhilwara

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नाम: अंशुल तोषनीवाल

वर्तमान पद: रिपोर्टर

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा जिला (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): सभी प्रकार के समाचार (General Reporting)

अनुभव: 6 माह

परिचय 

अंशुल तोषनीवाल भीलवाड़ा जिले से न्यूज़ वेबसाइट के लिए रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह भीलवाड़ा जिले और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की स्थानीय घटनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों, क्राइम, राजनीति और जनहित से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

अंशुल तोषनीवाल शैक्षणिक रूप से इंजीनियर (Engineer) हैं। उनकी तकनीकी और विश्लेषणात्मक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों को सटीकता से समझने और प्रस्तुत करने में मदद करती है।

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