भीलवाड़ा में निजी स्कूल कल रहेंगे बंद, सरकार की नीतियों के विरोध में कलेक्टर कार्यालय पर होगा प्रदर्शन
भीलवाड़ा जिला निजी स्कूल एवं संघर्ष समिति ने सरकार की कथित दमनकारी नीतियों के विरोध में एक दिवसीय सांकेतिक बंद का आह्वान किया है। जिले के सभी निजी स्कूल बंद रहेंगे और स्कूल संचालक कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। जानिए आंदोलन की सभी प्रमुख मांगें।

भीलवाड़ा जिले में सरकार की गैर-सरकारी स्कूलों के प्रति कथित दमनकारी नीतियों और प्रताड़ना के विरोध में भीलवाड़ा जिला निजी स्कूल एवं संघर्ष समिति ने एक दिवसीय सांकेतिक बंद का आह्वान किया है। आंदोलन के तहत बुधवार को जिले के सभी निजी शिक्षण संस्थान पूरी तरह बंद रहेंगे।
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि राज्य में गैर-सरकारी विद्यालयों का सामाजिक और शैक्षिक योगदान उल्लेखनीय रहा है, लेकिन पिछले कुछ समय से विभाग और राज्य सरकार द्वारा लगातार भेदभावपूर्ण नीतियां अपनाई जा रही हैं। उनका आरोप है कि आरटीई के तहत मिलने वाले भुगतान को नियमों और अनौपचारिक पाबंदियों के नाम पर रोका जा रहा है, जिससे निजी विद्यालयों का वित्तीय संचालन पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गया है।
समिति के अनुसार, आंदोलन के तहत जिले भर के स्कूल संचालक बुधवार को दोपहर 12 बजे जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने स्थित मुखर्जी उद्यान में एकत्रित होंगे। इसके बाद अपनी जायज मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
संघर्ष समिति ने अपनी मांगों में शिक्षा संबलन के नाम पर की जा रही निरीक्षण व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने की मांग की है। इसके साथ ही बिना नो-ड्यूज सर्टिफिकेट के अन्य विद्यालयों द्वारा सीधे टीसी जारी करने की बाध्यता को हटाने की मांग भी उठाई गई है।
समिति ने आरटीई के अंतर्गत प्री-प्राइमरी कक्षाओं (PP3+, PP4+, PP5+) का बकाया भुगतान तत्काल शुरू करने की मांग करते हुए कहा है कि किसी एक कक्षा में नॉन-आरटीई छात्र नहीं होने के आधार पर पूरे विद्यालय का भुगतान रोकने संबंधी नियम को तुरंत बदला जाए। इसके अलावा सत्र 2020 और 2021 के कोविड काल में ऑफलाइन शिक्षण कार्य कराने वाले विद्यालयों का आरटीई भुगतान बिना किसी शर्त के जारी करने की भी मांग की गई है।
संघर्ष समिति ने दोहरे नामांकन और बार-बार जांच के नाम पर निजी स्कूल संचालकों को मानसिक एवं प्रशासनिक रूप से प्रताड़ित किए जाने पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही आरटीई के अंतर्गत यूनिट कॉस्ट में प्रतिवर्ष 10 प्रतिशत वृद्धि का स्टैंडिंग ऑर्डर तत्काल जारी करने तथा आरटीई विद्यार्थियों की पाठ्यपुस्तकों की राशि 1000 रुपये से 2000 रुपये प्रति विद्यार्थी सीधे अभिभावकों अथवा स्कूल प्रबंधन के खातों में भेजने की मांग भी रखी गई है।
समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी 10 दिनों के भीतर इन सभी जायज मांगों का बिना किसी शर्त के निस्तारण नहीं किया गया तो राजस्थान के सभी गैर-सरकारी विद्यालय एक बड़े और व्यापक आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। समिति का कहना है कि ऐसी स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी शिक्षा विभाग और राज्य सरकार की होगी। साथ ही मुख्यमंत्री से इस संवेदनशील विषय पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए तत्काल राहत प्रदान करने की अपेक्षा भी व्यक्त की गई है।

Anshul Toshniwal, Bhilwara
नाम: अंशुल तोषनीवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): सभी प्रकार के समाचार (General Reporting)
अनुभव: 6 माह
परिचय
अंशुल तोषनीवाल भीलवाड़ा जिले से न्यूज़ वेबसाइट के लिए रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह भीलवाड़ा जिले और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की स्थानीय घटनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों, क्राइम, राजनीति और जनहित से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
अंशुल तोषनीवाल शैक्षणिक रूप से इंजीनियर (Engineer) हैं। उनकी तकनीकी और विश्लेषणात्मक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों को सटीकता से समझने और प्रस्तुत करने में मदद करती है।
