भीलवाड़ा: पोटलां तालाब में हजारों मछलियों की मौत, ग्रामीणों में रोष
भीलवाड़ा के पोटलां तालाब में मछली पालन ठेके और प्रदूषण के कारण हजारों मछलियों की मौत से स्थानीय लोगों में आक्रोश, प्रशासन से कार्रवाई की मांग।

भीलवाड़ा जिले के पोटलां तालाब में मछली पालन के दौरान दूषित पानी और ऑक्सीजन की कमी से मृत मछलियां तैर रही हैं।
जिले में स्थित ऐतिहासिक और धार्मिक आस्था के केंद्र पोटलां तालाब में इन दिनों स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है। तालाब की सतह पर तैरती हजारों मृत मछलियों ने इस खूबसूरत जलस्रोत को 'डेथ ट्रैप' यानी मौत के कुएं में तब्दील कर दिया है। सड़ती हुई मछलियों से उठने वाली असहनीय दुर्गंध ने न केवल स्थानीय निवासियों का जीना दूभर कर दिया है, बल्कि प्रशासन की इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी ने ग्रामीणों के सब्र का बांध तोड़ दिया है।
पोटलां तालाब केवल जल संरक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि इसकी परिधि में कई प्राचीन और पूजनीय मंदिर स्थित हैं, जहाँ रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। वर्तमान में दुर्गंध इतनी तीव्र है कि लोग मुंह पर कपड़ा ढके बिना मंदिर परिसर में कदम रखने में असमर्थ हैं। स्थानीय लोगों का स्पष्ट आरोप है कि यह स्थिति धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है और प्रशासन आस्था के इस केंद्र को बर्बाद होते हुए मूक दर्शक बनकर देख रहा है।
ग्रामीणों ने इस तबाही के लिए सीधे तौर पर मछली पालन की ठेका प्रथा को जिम्मेदार ठहराया है। ग्रामीणों के अनुसार, ठेकेदार अधिक मुनाफे के लालच में तालाब की क्षमता से कई गुना अधिक मछलियाँ डाल देते हैं। साथ ही, पानी में रसायनों के कथित उपयोग से न केवल मछलियाँ, बल्कि तालाब में मौजूद मगरमच्छों का जीवन भी खतरे में पड़ गया है। गंदगी और अत्यधिक सघनता के कारण पानी में ऑक्सीजन का स्तर न्यूनतम हो गया है, जिससे मछलियाँ घुट-घुट कर दम तोड़ रही हैं।
यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि हर साल गर्मी की शुरुआत होते ही पोटलां तालाब में सामूहिक रूप से मछलियों की मौत का यह खौफनाक सिलसिला शुरू हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि दर्जनों बार लिखित ज्ञापन देने के बावजूद अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई करते हैं और ठेके को रद्द करने के बजाय उसे बार-बार रिन्यू कर देते हैं, जो प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि सड़ती हुई मछलियों के कारण तालाब का पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है, जो रिसकर भूजल को भी जहरीला बना रहा है। यदि समय रहते इन मृत मछलियों को नहीं निकाला गया और पानी का शुद्धिकरण नहीं हुआ, तो क्षेत्र में किसी बड़ी महामारी का खतरा टालना असंभव होगा।
पोटलां के आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए मांग की है कि मछली पालन के ठेके को तत्काल निरस्त किया जाए, तालाब की पूर्ण सफाई हो और पानी में ऑक्सीजन बढ़ाने के वैज्ञानिक उपाय किए जाएं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि आगामी कुछ दिनों में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिसकी समस्त जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara
नाम: राजेश तोषनीवाल
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस
परिचय
राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।
- वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
- इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
