भीलवाड़ा जमीन विवाद: बुजुर्ग से गाली-गलौज के बाद थानाधिकारी बच्छराज चौधरी लाइन हाजिर
बनेड़ा थाने में परिवाद लेकर पहुंचे बुजुर्ग प्रभुलाल कुम्हार को हवालात में रखने और दूसरे पक्ष को उकसाने का वीडियो वायरल होने पर एसपी ने की कार्रवाई।

राजस्थान के भीलवाड़ा जिले से खाकी वर्दी को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां के बनेड़ा थाने में अपनी जमीन के विवाद की न्यायसंगत शिकायत लेकर पहुंचे एक पीड़ित बुजुर्ग के साथ थानाधिकारी द्वारा न केवल घोर गाली-गलौज की गई, बल्कि उन्हें करीब पांच घंटे तक अवैध रूप से थाने में बंद रखने का भी संगीन आरोप लगा है। इस पूरी अमर्यादित घटना का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद भीलवाड़ा के पुलिस अधीक्षक सागर राणा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित दंडात्मक कार्रवाई की है और आरोपी एसएचओ बच्छराज चौधरी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है।
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत गत 13 मई को हुई थी, जब बनेड़ा थाना क्षेत्र के बबराणा गांव के निवासी बुजुर्ग प्रभुलाल कुम्हार ने पुलिस में एक लिखित परिवाद दर्ज कराया था। पीड़ित बुजुर्ग ने अपनी शिकायत में पड़ोसियों पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उनकी जमीन पर रोड़ी यानी कंक्रीट डालकर उनका मुख्य रास्ता पूरी तरह से बंद कर दिया है। शिकायत मिलने पर जब पुलिस टीम ने मौके पर जाकर जमीनी हकीकत की जांच की, तो प्राथमिक दृष्टि में बुजुर्ग प्रभुलाल की शिकायत बिल्कुल सही पाई गई। इसके बाद आगामी कार्रवाई के लिए पुलिस ने 22 मई को परिवादी प्रभुलाल कुम्हार को बनेड़ा थाने में बुलवाया।
पीड़ित बुजुर्ग प्रभुलाल का आरोप है कि जब वे अपनी फरियाद लेकर एसएचओ के चैंबर में दाखिल हुए, तो थानाधिकारी ने उनकी समस्या सुनने और उसका विधिक समाधान करने के बजाय उनके साथ सीधे तौर पर गाली-गलौज करना शुरू कर दिया। जब पीड़ित ने इस दुर्व्यवहार का विरोध करते हुए कानून की दुहाई दी, तो एसएचओ बच्छराज चौधरी और ज्यादा भड़क गए तथा साफ शब्दों में बोले कि वे डराकर ही काम करेंगे। पीड़ित बुजुर्ग ने पुलिस के उच्च अधिकारियों को सौंपी अपनी आधिकारिक शिकायत में थानाधिकारी पर कई अन्य गंभीर और सनसनीखेज आरोप भी मढ़े हैं।
बुजुर्ग के अनुसार, उन्हें शांति भंग करने के झूठे मामले में फंसाकर दोपहर 1:00 बजे से लेकर शाम 6:00 बजे तक, यानी करीब 5 घंटे तक थाने के भीतर हवालात में बंद रखा गया और इसके बाद शाम 6:30 बजे उन्हें जबरन तहसीलदार के समक्ष पेश कर पाबंद कराया गया। पीड़ित का यह भी संगीन आरोप है कि जब उन्हें थाने में बंधक बनाकर बैठा रखा था, ठीक उसी समय एसएचओ ने जानबूझकर विपक्षी पक्ष को बुलाकर उनकी जमीन पर अवैध कब्जा करने के लिए उकसाया था। यही नहीं, जब पीड़ित ने इस घोर अन्याय और दुर्व्यवहार की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की बात कही, तो थानाधिकारी ने उन्हें गंभीर अंजाम भुगतने की खुली धमकी तक दे डाली।
मंगलवार को सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुए एक वीडियो ने इस पूरे मामले में भीलवाड़ा पुलिस की कार्यप्रणाली को पूरी तरह कठघरे में खड़ा कर दिया है। इस वीडियो में थानाधिकारी कथित तौर पर दूसरे पक्ष को उकसाते हुए बेहद आपत्तिजनक लहजे में यह कहते सुनाई दे रहे हैं कि "तुमने कोई चूड़ियां पहन रखी हैं... खंभे गाड़ के जाली लगा दो... इसके घर के सामने आज अगर करना है तो कर लेना।"
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद के केंद्र में आए और लाइन हाजिर किए गए थानाधिकारी बच्छराज चौधरी ने अपने ऊपर लगे इन सभी आरोपों पर अपनी सफाई पेश की है। निवर्तमान थानाधिकारी का कहना है कि बबराणा गांव में प्रभुलाल कुम्हार अपने बाड़े और खेत का गेट दूसरे पक्ष के मुकेश कुमार के घर के ठीक बाहर निकाल रहे थे, जिसे लेकर दोनों ही पक्षों के बीच पुराना जमीनी विवाद चल रहा था। बहरहाल, भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक सागर राणा के कड़े निर्देश पर इस वायरल वीडियो और पूरे घटनाक्रम की गहनता से विभागीय और विधिक जांच की जा रही है, जिसने खाकी की साख पर एक गहरा दाग लगा दिया है।

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