भीलवाड़ा। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भीलवाड़ा पुलिस के खिलाफ उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव के गंभीर आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया है। सामाजिक कार्यकर्ता जीवन ऐरवाल की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आयोग ने भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

आसपा के पूर्व प्रदेश सचिव पर मारपीट का मामला

पूर्व प्रदेश सचिव जीवन ऐरवाल ने बताया कि मामला 28 नवंबर 2024 का है। पीड़ित जीवन ऐरवाल का आरोप है कि "मीरा सर्कल स्थित एक निजी कंपनी में विवाद के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर अपमानित किया गया।" पीड़ित ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने मदद के लिए '100 नंबर' पर पुलिस को कॉल किया, तो पुलिस ने सहायता करने के बजाय उन्हें ही हिरासत में ले लिया। थाने में उनके साथ मारपीट की गई और जबरन सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए।

स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने पर आयोग की शरण

पीड़ित का कहना है कि इस घटना के संबंध में उन्होंने जिला पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी, आरटीआई आवेदन लगाए और प्रथम अपील भी की, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। न्याय न मिलने पर पीड़ित ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित 15 दिनों की समय सीमा में संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं होता है, तो आयोग अपनी संवैधानिक शक्तियों का उपयोग करते हुए आगे की दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाएगा।

स्वतंत्र जांच और एफआईआर की मांग

मामले की निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज हो। पीड़ित और उनके परिवार को उचित सुरक्षा प्रदान की जाए। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद अब क्षेत्र के विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी एकजुट होकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story