भीलवाड़ा: धार्मिक आधार पर उत्पीड़न और धमकी का मामला, कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने दर्ज की FIR
भीलवाड़ा के भीमगंज में धार्मिक आधार पर धमकी और उत्पीड़न के मामले ने तूल पकड़ लिया है। एम्बुलेंस संचालक अमजद शेख की शिकायत पर पुलिस की चुप्पी के बाद, कोर्ट के हस्तक्षेप पर अब FIR दर्ज हुई है। महात्मा गांधी अस्पताल परिसर से शुरू हुए इस विवाद और पुलिसिया कार्रवाई की पूरी रिपोर्ट यहाँ पढ़ें, जिसमें न्यायपालिका ने पीड़ित को दी बड़ी राहत।

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में कानून के रक्षक जब चुप्पी साध गए, तो न्याय की गुहार अदालत के दरवाजे तक जा पहुँची। शहर के भीमगंज थाना क्षेत्र में धार्मिक पहचान को आधार बनाकर दी गई धमकियों और मानसिक उत्पीड़न के एक गंभीर मामले में न्यायालय के कड़े रुख के बाद आखिरकार पुलिस को मुकदमा दर्ज करना पड़ा है। यह मामला न केवल एक व्यक्ति के साथ हुए दुर्व्यवहार को रेखांकित करता है, बल्कि पुलिसिया कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े करता है, जिसके कारण पीड़ित को दर-दर भटकना पड़ा।
घटनाक्रम की शुरुआत 27 दिसंबर 2025 को हुई, जब महात्मा गांधी अस्पताल परिसर स्थित एम्बुलेंस स्टैंड पर माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। गुलअली नगरी के निवासी और पेशे से एम्बुलेंस संचालक अमजद शेख पुत्र अय्याज अहमद शेख के अनुसार, उस दिन उनके भाई के साथ धार्मिक आधार पर अपमानजनक टिप्पणी की गई। विवाद यहीं नहीं थमा; इसके बाद परिवादी अमजद शेख को मोबाइल फोन के जरिए जान से मारने और अंजाम भुगतने की धमकियां दी जाने लगीं। इस लगातार जारी उत्पीड़न ने न केवल अमजद शेख, बल्कि उनके पूरे परिवार को गहरे मानसिक तनाव और भय के साये में जीने को मजबूर कर दिया।
हैरानी की बात यह है कि पीड़ित ने न्याय के लिए तत्काल कदम उठाए। उन्होंने 28 दिसंबर 2025 को भीमगंज थाने में लिखित रिपोर्ट दी और अगले ही दिन, यानी 29 दिसंबर को भीलवाड़ा पुलिस अधीक्षक को भी अपनी आपबीती सुनाई। बावजूद इसके, पुलिस प्रशासन द्वारा मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया और एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल की गई। पुलिस की इस बेरुखी से आहत होकर अमजद शेख ने अंततः न्यायपालिका की शरण ली और न्यायालय में परिवाद पेश किया।
मामले की गंभीरता को समझते हुए, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-02, भीलवाड़ा ने परिवाद, शपथपत्र और प्रस्तुत दस्तावेजों का बारीकी से अवलोकन किया। न्यायालय ने पुलिस की प्रारंभिक शिथिलता को दरकिनार करते हुए भीमगंज थाना पुलिस को तुरंत मुकदमा दर्ज कर गहन अनुसंधान करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए। अदालत के इस आदेश ने पीड़ित परिवार के लिए न्याय की उम्मीद जगा दी है।
न्यायालय की फटकार और आदेश की पालना में अब भीमगंज थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस प्रशासन ने अब इस संवेदनशील प्रकरण की कमान एएसआई कृष्णगोपाल को सौंपी है, जो मामले के सभी पहलुओं की जांच करेंगे। यह घटना भीलवाड़ा जैसे शांत शहर में सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने के प्रयासों और नागरिक अधिकारों की रक्षा में न्यायपालिका की अपरिहार्य भूमिका को दर्शाती है। अब सभी की निगाहें पुलिस की जांच पर टिकी हैं कि क्या वह इस मामले के दोषियों तक पहुँच पाती है।

Pratahkal Bureau
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