भीलवाड़ा: पुलिस गश्त को ठेंगा, बेखौफ बदमाशों ने दूध डेयरी और केबिन को फूंका, दहशत में शहर
भीलवाड़ा के प्रताप नगर में पुलिस गश्त की पोल खोलते हुए बदमाशों ने मुकेश सिसोदिया की दूध डेयरी और एक चाय केबिन को आग के हवाले कर दिया। मानसरोवर झील के सामने हुई इस आगजनी में लाखों का सामान जलकर खाक हो गया, जिससे क्षेत्र में दहशत और पुलिस के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

भीलवाड़ा। वस्त्र नगरी के प्रताप नगर थाना क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए असामाजिक तत्वों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। शहर के मानसरोवर झील के ठीक सामने स्थित एक दूध डेयरी और चाय-कॉफी के केबिन को देर रात आग के हवाले कर अपराधियों ने न केवल दो परिवारों की आजीविका छीनी, बल्कि पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। यह वारदात पुलिस की ढीली गश्त और अपराधियों के मन से खत्म होते कानून के डर की एक जीवंत बानगी पेश करती है।
घटनाक्रम के अनुसार, आधी रात के सन्नाटे में जब शहर सो रहा था, तब करीब एक बजे असामाजिक तत्वों ने इस कायराना करतूत को अंजाम दिया। मानसरोवर झील के सामने स्थित मुकेश सिसोदिया की दूध डेयरी को बदमाशों ने निशाना बनाया। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और डेयरी में रखे फ्रिज, कीमती मशीनें, बर्तन और अन्य सारा सामान धूं-धूं कर जलने लगा। आग की लपटें इतनी भीषण थीं कि उसने पास ही स्थित 'जय मां भवानी चाय-कॉफी केबिन' को भी अपनी आगोश में ले लिया। इस आगजनी में केबिन की पूरी संरचना, गैस सिलेंडर और दुकान का सारा सामान जलकर राख के ढेर में तब्दील हो गया।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस संवेदनशील इलाके में पुलिस की रात्रि गश्त केवल कागजों तक ही सीमित रह गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अपराधी बड़ी ही इत्मीनान से वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए, जिससे स्पष्ट होता है कि उन्हें पुलिस का कोई भय नहीं था। हालांकि, सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां और प्रताप नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक मुकेश सिसोदिया और चाय केबिन संचालक की वर्षों की मेहनत की कमाई खाक हो चुकी थी। स्थानीय लोगों की मदद से दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, किंतु नुकसान की भरपाई अब असंभव नजर आती है।
इस घटना ने प्रताप नगर क्षेत्र के निवासियों में भारी आक्रोश और असुरक्षा की भावना भर दी है। लगातार बढ़ती आपराधिक गतिविधियों के बीच पुलिस की सुस्त निगरानी व्यवस्था अब जनचर्चा का केंद्र बनी हुई है। पीड़ितों ने न्याय की गुहार लगाते हुए अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की है। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन और पुलिस विभाग इस घटना से सबक लेकर रात्रि गश्त को प्रभावी बनाता है, या फिर अपराधियों के हौसले इसी तरह कानून की नाक के नीचे बुलंद बने रहेंगे।

Pratahkal Bureau
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