भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में खाकी पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगे हैं। जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए एक शिकायत पत्र में हमीरगढ़ थाना पुलिस और जिला विशेष टीम (डीएसटी) पर अपने पद का दुरुपयोग करने तथा एक युवक को जबरन हिरासत में लेकर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है। ग्राम बिलियाकलां के समस्त ग्रामीणों की ओर से दिए गए इस ज्ञापन में साफ कहा गया है कि पुलिस ने अपने इस कृत्य को छुपाने के लिए झूठे और गलत तथ्यों के आधार पर एफआईआर संख्या 87/2026 दर्ज की है। ग्रामीणों ने इस पूरे प्रकरण की सीआईडी-सीबी से निष्पक्ष व उच्च अधिकारियों की देखरेख में जांच कराने और दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बिलियाकला निवासी पीड़ित युवक कमलेश गुर्जर के पिता भंवरलाल गुर्जर ने पुलिस और डीएसटी टीम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि उनका बेटा कमलेश गुर्जर बरडौद चौराहे पर स्थित देवनारायण मंदिर के पास बैठा हुआ था, तभी करीब रात्रि साढ़े आठ बजे पुलिस और डीएसटी की टीम वहां धमक पड़ी और उसे जबरन उठाकर अपनी कस्टडी में ले गई। भंवरलाल गुर्जर का सीधा आरोप है कि पुलिस कस्टडी में रहने के दौरान उनके बेटे कमलेश के साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की गई, जिससे उसका पैर बुरी तरह टूट गया।

इसके बाद पुलिस ने अपने इस अमानवीय कृत्य पर पर्दा डालने के लिए एक मनगढ़ंत कहानी रची और देर रात यह दावा कर दिया कि कमलेश ने पुलिस टीम पर फायरिंग की थी। पीड़ित के पिता ने तार्किक सवाल खड़ा करते हुए कहा कि जब उनके बेटे को रात साढ़े आठ बजे ही पुलिस ने डिटेन कर लिया था, तो वह इसके बाद पुलिस टीम पर फायरिंग कैसे कर सकता है? पुलिस द्वारा लगाया गया यह आरोप पूरी तरह झूठा, मनगढ़ंत और फर्जी है। पीड़ित के पिता ने स्पष्ट किया कि कमलेश का पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड या फायरिंग का मामला नहीं है और न ही पुलिस से उनकी कोई पुरानी रंजिश थी। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि पुलिस के दावों और मोबाइल लोकेशन की निष्पक्षता से जांच की जाए ताकि उनके निर्दोष बेटे को न्याय मिल सके।

शिकायत में घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए आगे कहा गया है कि जब पुलिस की मारपीट से कमलेश का पैर टूट गया, तो पुलिसवालों ने अपने बचाव के लिए एक और फर्जी कहानी तैयार की। पुलिस उसे हमीरगढ़ से स्वरूपगंज जाने वाली बनास नदी की पुलिया पर लेकर गई और वहां एफआईआर संख्या 87/2026 के तहत यह झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया कि कमलेश अवैध हथियार लेकर आ रहा था और पुलिया पर पुलिस को देखकर भागने के प्रयास में उसका पैर टूट गया। ग्रामीणों ने इस थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए तर्क दिया है कि जब पुलिस ने अपनी एफआईआर में घटना का समय रात्रि करीब 12:36 बजे बनास नदी की पुलिया पर होना दर्शाया है, तो फिर डीएसटी टीम द्वारा कमलेश को रात्रि 8:40 बजे ही स्वरूपगंज चौकी में कस्टडी में लेने और उसकी गाड़ी पुलिसकर्मी द्वारा खुद चलाकर लाने की वास्तविकता को क्यों छुपाया जा रहा है? इसके साथ ही ग्रामीणों ने पुलिस द्वारा बरामद दिखाए गए हथियार को भी पूरी तरह फर्जी करार दिया है।

मामले में आक्रोश व्यक्त करते हुए गुर्जर समाज के जिला अध्यक्ष श्यामलाल गुर्जर ने भी पुलिस प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कमलेश गुर्जर को पुलिस ने देवनारायण मंदिर से डिटेन किया था और पुलिस उसे रात 8 बजे ही वहां से उठाकर अपनी कस्टडी में ले चुकी थी। ऐसे में पुलिस का बाद में यह दावा करना कि कमलेश ने उन पर क्रॉस फायरिंग की, पूरी तरह से संदेहास्पद और समझ से परे है। जब एक व्यक्ति पहले से ही पुलिस की कस्टडी में बंद था, तो वह पुलिस टीम पर फायरिंग कैसे कर सकता है?

उन्होंने रोष जताते हुए आगे कहा कि कमलेश गुर्जर के खिलाफ जो भी पुराने मुकदमे थे, उनकी सजा वह अदालत के नियमानुसार पूरी तरह काट चुका है। अपराधी को सजा देने का काम न्यायपालिका का है, लेकिन इस मामले में पुलिस ने कमलेश को मंदिर से उठाकर जिस तरह उसके साथ अमानवीय मारपीट की और उसका पैर तोड़ा, वह किसी गुंडागर्दी और अपहरण की वारदात जैसी प्रतीत होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर खुद कानून की रखवाली करने वाला पुलिस प्रशासन ही इस तरह की गुंडागर्दी पर उतर आएगा, तो आम जनता न्याय के लिए आखिर कहां जाएगी? गुर्जर समाज ने पुलिस अधीक्षक (एसपी) को दिए ज्ञापन में सख्त चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर पीड़ित को न्याय नहीं मिला, तो समाज आगे की उग्र रणनीति तय करने के लिए मजबूर होगा।

Pratahkal Newsroom

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