नाबालिग बेटियों की सुरक्षा और सामाजिक न्याय की दिशा में भीलवाड़ा की पोक्सो अदालत ने एक बड़ा और कड़ा संदेश दिया है। विशिष्ट न्यायाधीश (पोक्सो कोर्ट संख्या 1) रेखा वधवा ने एक नाबालिग लड़की से छेड़छाड़ करने और उसके अश्लील फोटो वायरल करने की धमकी देने के गंभीर मामले में त्वरित सुनवाई करते हुए आरोपी आसिफ मोहम्मद शेख को दोषी करार दिया है। माननीय न्यायालय ने दोषी आसिफ मोहम्मद शेख को 3 वर्ष के कठोर कारावास और 12,000 रुपये के अर्थदंड (जुर्माने) की सजा सुनाई है। कोर्ट के इस सख्त फैसले से क्षेत्र के अपराधियों में हड़कंप मच गया है।

यह पूरा संवेदनशील मामला भीलवाड़ा जिले के आसींद थाना क्षेत्र का है, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया था। घटना के संबंध में 16 अगस्त 2024 को पीड़िता के पिता ने आसींद थाने में एक लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, घटना वाले दिन पीड़ित लड़की के माता-पिता अपनी आजीविका के लिए मजदूरी पर गए हुए थे और उनकी 16 वर्षीय नाबालिग पुत्री घर पर पूरी तरह अकेली थी।

इसी सूनेपन का फायदा उठाकर आरोपी आसिफ मोहम्मद शेख दुर्भावनापूर्ण इरादे से अवैध रूप से घर के भीतर घुस गया और अकेलेपन का लाभ उठाते हुए नाबालिग के साथ जबरन छेड़छाड़ करने लगा। जब डरी-सहमी पीड़िता ने हिम्मत दिखाते हुए इसका कड़ा विरोध किया, तो आरोपी ने सारी हदें पार करते हुए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और उसे अत्यंत गंभीर धमकी दी। आरोपी ने पीड़िता को डराते हुए कहा कि "मेरे पास तेरे अश्लील फोटो हैं, अगर तूने मना किया या किसी को बताया तो मैं इन्हें वायरल कर दूंगा।" हालांकि, बहादुर पीड़िता ने घुटने टेकने के बजाय जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया, जिससे घबराकर आरोपी आसिफ मौके से तुरंत भाग खड़ा हुआ।

पीड़िता के परिवार द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद आसींद थाना पुलिस ने त्वरित और गहन कार्रवाई की। पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर विभिन्न सुसंगत धाराओं और पोक्सो एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act) के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान (जांच) शुरू किया। पुलिस प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्परता दिखाई और आरोपी आसिफ को अविलंब गिरफ्तार कर उसके खिलाफ न्यायालय में पुख्ता आरोप-पत्र (चार्जशीट) पेश किया।

न्यायालय में चली लंबी और गंभीर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से बेहद कड़ी पैरवी की गई। विशिष्ट लोक अभियोजक धर्मवीर सिंह कानावत ने कोर्ट के समक्ष कानून का पक्ष मजबूती से रखते हुए कुल 9 गवाह और 14 महत्वपूर्ण दस्तावेज साक्ष्य के रूप में पेश किए। इन अकाट्य साक्ष्यों और गवाहों ने आरोपी के खिलाफ अपराध को पूरी तरह और अकाट्य रूप से सिद्ध कर दिया, जिससे आरोपी के बचने का कोई रास्ता नहीं बचा।

अदालत ने दोनों पक्षों की अंतिम बहस और गवाहों के बयानों को अत्यंत गहराई से मद्देनजर रखते हुए पोक्सो कोर्ट संख्या 1 की न्यायाधीश रेखा वधवा ने आरोपी आसिफ मोहम्मद शेख को इस घिनौने कृत्य का मुख्य दोषी माना। न्यायालय ने समाज में ऐसे गंभीर और संवेदनशील अपराधों पर पूरी तरह अंकुश लगाने और अपराधियों में कानून का खौफ पैदा करने के कड़े संदेश के साथ आरोपी को 3 वर्ष के कठोर कारावास और 12,000 रुपये आर्थिक जुर्माने की सजा से दंडित किया। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट आदेश दिया है कि यदि दोषी द्वारा जुर्माना नहीं भरा जाता है, तो उसे अतिरिक्त कारावास की अवधि भुगतनी होगी। यह फैसला समाज में बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कानून व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

Pratahkal Bureau

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