भीलवाड़ा में फिर हो सकता है फूलडोल महोत्सव, आचार्य रामदयालजी महाराज ने दिए संकेत
अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के पीठाधीश्वर आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने भीलवाड़ा में आगामी फूलडोल महोत्सव आयोजित करने के संकेत दिए हैं, जिससे भक्तों में हर्ष है।

अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज भीलवाड़ा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा में रामस्नेही संप्रदाय के वार्षिक फूलडोल महोत्सव के आयोजन की संभावना ने श्रद्धालुओं में उत्साह बढ़ा दिया है। अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने भीलवाड़ा में एक बार फिर फूलडोल महोत्सव आयोजित करने के संकेत दिए हैं। इसके बाद से ही रामस्नेही भक्त लगातार आचार्यश्री से आगामी महोत्सव भीलवाड़ा में आयोजित करने का आग्रह कर रहे हैं। श्रद्धालुओं को अब आचार्यश्री की विधिवत घोषणा का इंतजार है।
आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने भीलवाड़ा में आयोजित ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत 12 से 19 सितंबर तक हुए विराट श्रीमद्भागवत ज्ञान सप्ताह के समापन दिवस पर अपने उद्बोधन में इस संभावना के संकेत दिए थे। इसके बाद रामस्नेही श्रद्धालुओं और भक्तों ने उनसे आग्रह किया कि आगामी फूलडोल महोत्सव के आयोजन का सौभाग्य भीलवाड़ा को मिले। इस पर आचार्यश्री ने विचार करने की बात कही है।
आचार्य रामदयालजी महाराज ने 19 सितंबर को अपने उद्बोधन में भीलवाड़ा की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा था कि यह वह पावन धरा है, जहां स्वामी रामचरणजी महाराज ने साधना की और उनकी भक्ति के अद्भुत चमत्कार देखने को मिले। भीलवाड़ा की धरती पर विक्रम संवत 1817 में रामस्नेही संप्रदाय का प्रादुर्भाव हुआ और विक्रम संवत 1820 में अनुभव वाणी का उद्गम हुआ। इसी क्रम में विक्रम संवत 1822 में भीलवाड़ा रामद्वारा की स्थापना हुई और पहला फूलडोल महोत्सव भी इसी धरती पर आयोजित किया गया।
आचार्यश्री ने कहा था कि जिस समय फूलडोल महोत्सव भीलवाड़ा से शाहपुरा गया, उस समय की मांग यही थी। भीलवाड़ा से शाहपुरा जाने के बाद अब तक तीन बार फूलडोल महोत्सव शाहपुरा से बाहर उदयपुर में आयोजित हो चुका है। उन्होंने कहा कि श्रीमहाराज की कृपा हुई तो एक फूलडोल महोत्सव भीलवाड़ा में आयोजित करने की भावना है। इसके लिए शाहपुरा के संतों और भक्तों से भी चर्चा की जाएगी। आचार्यश्री ने इच्छा जताई कि भीलवाड़ा में पांच दिन तक जुलूस निकले और भव्य आयोजन हो। उन्होंने कहा कि श्रीमहाराज की कृपा से जैसा आदेश होगा, उसकी सूचना दे दी जाएगी।
अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय का पहला फूलडोल मेला महोत्सव विक्रम संवत 1822 में भीलवाड़ा में आयोजित हुआ था। संप्रदाय के इतिहास के अनुसार, स्वामी रामचरणजी महाराज ने विक्रम संवत 1817 में भीलवाड़ा में पदार्पण किया था। उन्होंने मयारामजी की बावड़ी में स्थित एक गुफा को अपनी साधना का स्थल चुना। उस समय यह स्थान भूतों की बावड़ी के नाम से प्रसिद्ध था। भीलवाड़ा में रामस्नेही संप्रदाय की स्थापना के बाद दूर-दूर से लोग यहां आने लगे और संप्रदाय से जुड़ते गए। स्वामी रामचरणजी महाराज के दर्शन कर श्रद्धालु उनके चरणों में शांति और सुख की अनुभूति करते थे। धीरे-धीरे उनकी महिमा दूर-दूर तक फैल गई।
इसी दौरान नगर के प्रमुख भामाशाह मयाचंद तोषनीवाल के पुत्र देवकरण तोषनीवाल भी स्वामीजी के दर्शन करने पहुंचे। उनके दर्शन मात्र से देवकरण की आत्मा तृप्त हो गई। उन्होंने स्वामीजी से जिज्ञासावश कुछ प्रश्न पूछे। अपनी जिज्ञासाओं के अनुरूप उत्तर मिलने से देवकरण अत्यंत प्रभावित हुए। नगर लौटकर उन्होंने अपने मित्र नवल राम मंत्री और कुशलराम बिड़ला से स्वामीजी के बारे में चर्चा की। इसके बाद तीनों मित्र महाराज के दर्शन के लिए बावड़ी पहुंचे।
देवकरण तोषनीवाल, उनके मित्रों और समस्त रामस्नेही भक्तों ने विचार-विमर्श के बाद विक्रम संवत 1822 में सरकार से तत्काल 12 बीघा पक्की भूमि क्रय की और भीलवाड़ा में विशाल रामद्वारा भवन का निर्माण करवाया। उस समय स्वामी रामचरणजी महाराज भीलवाड़ा में विराजमान थे। धर्म के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से रामस्नेही भक्तों ने वार्षिक उत्सव मनाने का विचार किया। उत्सव कब और किस नाम से मनाया जाए, इस पर चर्चा हुई।
स्वामीजी महाराज ने बताया कि फाल्गुन का महीना है और ऋतुराज वसंत का समय चल रहा है। भक्त प्रह्लाद की परीक्षा का दिवस होली भी निकट था। उन्होंने होली के दिन वार्षिक उत्सव मनाने का निर्णय सुनाया और कहा कि इसका नाम बाद में विचार कर रखा जाएगा। भक्तों ने तैयारियां शुरू कर दीं और पूर्णिमा का दिन आ गया। सभी भक्तों ने मिलकर बाजार के मध्य चौराहे पर भव्य सजावट के साथ उत्सव की व्यवस्था की। गुरु महाराज के लिए उछासन सजाया गया, ताकि परिचित और अपरिचित सभी लोग उनके दर्शन कर सकें और रामस्नेही धर्म से परिचित हो सकें।
समस्त व्यवस्थाएं पूरी होने के बाद भक्तजन रामद्वारा पहुंचे और स्वामीजी महाराज से नगर में पधारने की विनम्र प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि स्वामीजी का अवतार रामभक्ति के प्रचार-प्रसार के लिए हुआ है। वे कृपालु और दया के भंडार हैं तथा राम महामंत्र के माध्यम से अनेक पतितों को पावन कर चुके हैं। इसके बाद स्वामी रामचरणजी महाराज को संत मंडली और विशाल भक्त समुदाय के साथ गाजे-बाजे, पगमड़ा बिछाते हुए तथा चंवर करते हुए राम नाम के जयघोष के बीच भव्य जुलूस के रूप में लाया गया। उनके दर्शन कर जिज्ञासु श्रद्धालु आनंदमग्न हो गए।
स्वामी रामचरणजी महाराज जब नगर में पहुंचकर आसन पर विराजमान हुए, तब समस्त नगरवासी जयकारे लगाने लगे और हाथ जोड़कर उनकी मनोहर छवि के दर्शन करने लगे। इसके बाद नाम प्रताप, प्रह्लाद चरित्र आदि का पाठ हुआ। उपदेश और प्रवचन के बाद नाम जप का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी दौरान स्वामीजी महाराज ने बताया कि देवताओं ने अपने-अपने विमानों में बैठकर आकाश से पुष्पवृष्टि की है। इसलिए रामस्नेही धर्म के इस वार्षिक उत्सव का नाम ‘फूलडोल मेला’ रखा जाएगा।
भीलवाड़ा में फूलडोल महोत्सव के आयोजन की संभावना अब आचार्यश्री के विचार और आगामी निर्णय पर टिकी है। यदि आयोजन की विधिवत घोषणा होती है, तो रामस्नेही संप्रदाय के उस ऐतिहासिक उत्सव का आयोजन फिर उसी धरती पर हो सकेगा, जहां इसकी शुरुआत हुई थी।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara
नाम: राजेश तोषनीवाल
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस
परिचय
राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।
- वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
- इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
