पन्नाधाय की पहचान बदलने पर विवाद गहराया, भीलवाड़ा में संगठनों ने सौंपा ज्ञापन
भीलवाड़ा में पन्नाधाय की ऐतिहासिक और जातीय पहचान को लेकर विवाद गहराया। "भारत के नारी रत्न" पुस्तक के विवरण पर संगठनों ने प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा और तत्काल संशोधन व निष्पक्ष जांच की मांग की।

तस्वीर में भीलवाड़ा कलेक्ट्रेट के बाहर पन्नाधाय की ऐतिहासिक पहचान पर विवाद के विरोध में प्रदर्शन करते हुए विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता और पदाधिकारी नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा में मेवाड़ की महान बलिदानी वीरांगना पन्नाधाय की ऐतिहासिक और जातीय पहचान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। केंद्रीय प्रकाशन विभाग की पुस्तक "भारत के नारी रत्न" में पन्नाधाय की पहचान कथित तौर पर बदलने के विरोध में विभिन्न सामाजिक और राष्ट्रवादी संगठनों ने प्रदर्शन कर तत्काल संशोधन की मांग उठाई है।
श्री राष्ट्रीय राजपूत करणी सेना और राष्ट्रीय बजरंग दल के संयुक्त नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने भीलवाड़ा कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। इसके बाद देश के प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। संगठनों ने कहा कि महान विभूतियों के इतिहास के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विवाद का केंद्र केंद्रीय प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक "भारत के नारी रत्न" है। पुस्तक की संपादक ऋतुश्री हैं। इसका ISBN 978-93-5409-692-1 है और इसका आठवां पुनर्मुद्रण 2022 में हुआ है। विवाद पुस्तक के पृष्ठ संख्या 08 पर प्रकाशित विवरण को लेकर है। संगठनों के अनुसार, इसमें वीरांगना पन्नाधाय की मूल ऐतिहासिक पहचान और जाति को बदलकर उन्हें "खींची राजपूत वंश की क्षत्राणी" दर्शाया गया है।
स्थानीय संगठनों और समाज के प्रतिनिधियों का तर्क है कि पुस्तक में प्रकाशित यह प्रविष्टि स्वीकृत ऐतिहासिक तथ्यों, प्रामाणिक दस्तावेजों और शोध ग्रंथों के विपरीत है। उनका दावा है कि पन्नाधाय का इतिहास और उनकी पहचान सर्वविदित है। ऐसे में सरकारी प्रकाशन में इस तरह के बदलाव से इतिहास को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
ज्ञापन के माध्यम से सरकार और प्रकाशन विभाग के समक्ष मांग रखी गई कि पुस्तक में प्रकाशित भ्रामक और त्रुटिपूर्ण विवरण को तुरंत हटाकर प्रामाणिक ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर सुधार किया जाए। साथ ही इतिहासकारों, विषय विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों की एक संयुक्त समिति गठित कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई।
संगठनों ने यह भी मांग की कि जांच और संशोधन की प्रक्रिया पूरी होने तक संबंधित पुस्तक के आगामी संस्करणों के मुद्रण और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए। इसके अलावा राष्ट्रीय महत्व की महान विभूतियों के जीवन पर सामग्री प्रकाशित करने से पहले प्रमाणित ऐतिहासिक स्रोतों का अनिवार्य सत्यापन सुनिश्चित करने की मांग भी ज्ञापन में रखी गई।
प्रदर्शन के दौरान मौजूद पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस गंभीर विषय पर उचित कदम नहीं उठाए गए, तो विरोध प्रदर्शन को और अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा। अब विवादित विवरण में संशोधन और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर संगठनों की ओर से आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

Anshul Toshniwal, Bhilwara
नाम: अंशुल तोषनीवाल
वर्तमान पद: रिपोर्टर
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा जिला (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): सभी प्रकार के समाचार (General Reporting)
अनुभव: 6 माह
परिचय
अंशुल तोषनीवाल भीलवाड़ा जिले से न्यूज़ वेबसाइट के लिए रिपोर्टर के रूप में कार्यरत हैं। वह भीलवाड़ा जिले और उसके अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों की स्थानीय घटनाओं, प्रशासनिक गतिविधियों, क्राइम, राजनीति और जनहित से जुड़ी सभी प्रकार की खबरों को नियमित रूप से कवर करते हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
अंशुल तोषनीवाल शैक्षणिक रूप से इंजीनियर (Engineer) हैं। उनकी तकनीकी और विश्लेषणात्मक पृष्ठभूमि उन्हें खबरों को सटीकता से समझने और प्रस्तुत करने में मदद करती है।
