भीलवाड़ा में पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा संपन्न, उमड़ी भारी भीड़
सात दिवसीय आयोजन के समापन पर रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा, सुरक्षा व्यवस्था संभालने में पुलिस को करनी पड़ी मशक्कत।

राजस्थान की धर्मनगरी भीलवाड़ा की धरा पर पिछले सात दिनों से प्रवाहित हो रही भक्ति की अविरल धारा को मंगलवार को विराम मिला। प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा (सीहोर वाले) के मुखारबिंद से आयोजित 'श्री शिव महापुराण कथा' के संपन्न होते ही लाखों शिवभक्तों की विदाई का सिलसिला प्रारंभ हुआ। आस्था के इस अभूतपूर्व महाकुंभ के विसर्जन के पश्चात संपूर्ण शहर शिवमय आभा से सराबोर नजर आया, जहाँ रेलवे स्टेशन से लेकर बस स्टैंड तक तिल रखने की भी जगह शेष नहीं बची। संकटमोचन हनुमान मंदिर के महंत बाबूगिरीजी महाराज के पावन सानिध्य में आजाद नगर स्थित मेडिसिटी ग्राउंड में आयोजित इस भव्य आयोजन के अंतिम दिन मंगलवार को प्रातः 8 से 11 बजे तक कथा की अमृत वर्षा हुई।
जैसे ही कथा को औपचारिक विराम मिला, पंडालों में उपस्थित लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान करने लगे, जिसके परिणामस्वरूप शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। कथा की समाप्ति के उपरांत भीलवाड़ा रेलवे स्टेशन और रोडवेज बस स्टैंड पर शिवभक्तों का भारी हुजूम उमड़ पड़ा, जिसे 'भीड़ का विस्फोट' कहा जा सकता है। स्थिति यह थी कि रेलवे स्टेशन के समस्त प्लेटफॉर्म श्रद्धालुओं से खचाखच भरे रहे और बाहर से आए श्रद्धालु अपने घरों को लौटने हेतु ट्रेनों एवं बसों में स्थान पाने के लिए कड़ा संघर्ष करते दिखाई दिए। रोडवेज बस स्टैंड पर भी यात्रियों के अतिरिक्त दबाव के कारण विशेष प्रबंध किए गए, किंतु जनसैलाब के समक्ष प्रशासन की व्यवस्थाएं बौनी सिद्ध हुईं।
भीड़ के अत्यधिक दबाव और सुरक्षा संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूर्णतः अलर्ट मोड़ पर रहा। प्रमुख चौराहों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर पुलिस के पुख्ता पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित किए गए ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को टाला जा सके। मेडिसिटी ग्राउंड से लेकर रेलवे स्टेशन तक के मार्गों पर उमड़ी भारी भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात सुचारू करने में पुलिस कर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। सात दिनों तक भीलवाड़ा में शिव भक्ति का जो ज्वार उठा, उसने शहर को एक नवीन विशिष्ट पहचान प्रदान की है। विदा हो रहे शिवभक्तों की अश्रुपूरित आंखें और लबों पर 'हर-हर महादेव' का गूंजता उद्घोष इस आयोजन की आध्यात्मिक सार्थकता और गहरे प्रभाव को प्रतिध्वनित कर रहा था।

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
