भीलवाड़ा में पंचायतीराज मंत्रालयिक कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। 10 से 16 जून तक 'कलम डाउन' का ऐलान करते हुए कर्मचारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। क्या सरकार मान पाएगी कर्मचारियों की शर्तें या आंदोलन होगा और उग्र?

भीलवाड़ा। पंचायतीराज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों का अपनी लंबित मांगों को लेकर चल रहा संघर्ष अब और अधिक मुखर होता जा रहा है। अपनी मांगों के समर्थन में पिछले कई दिनों से आंदोलनरत इन कर्मचारियों ने अब सरकार पर दबाव बनाने के लिए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। आगामी 10 से 16 जून तक प्रदेश भर के मंत्रालयिक कर्मचारी आधा दिन 'कलम डाउन' यानी कार्य बहिष्कार पर रहेंगे, जिससे विभागीय कामकाज के प्रभावित होने की पूरी संभावना है।

आंदोलन की इसी कड़ी में प्रदेश प्रतिनिधि अशोक कुमार वैष्णव के नेतृत्व में मंत्रालयिक कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर एवं जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) से मुलाकात की। इस दौरान मुख्यमंत्री के नाम संबोधित एक ज्ञापन सौंपकर कर्मचारियों ने अपनी व्यथा और मांगों को सरकार तक पहुँचाने की पुरजोर कोशिश की। ज्ञापन सौंपते समय वहां बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपनी एकजुटता और संकल्प का प्रदर्शन किया।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर जिला अध्यक्ष शोभा लाल तेली, पवन शर्मा, प्रमोद जैन, भानु प्रकाश, कन्हैया लाल कुमावत, सियाराम पारीक, विजेंद्र सिंह, नारायण तेली, प्रहलाद सुथार, चेतन व्यास, अनिल जैन, सोमेंद्र सिंह, राधेश्याम वैष्णव, शिवदयाल जाट, मनोज शर्मा, जयकिशन पारीक, भैरू लाल खटीक, गिरिराज व्यास, अभिषेक न्याती, मनीष भट्ट, कमलेश सुवालका, डालचंद रेगर, नाना लाल अहीर, मुकेश पारीक, राधेश्याम अहीर, हरिशंकर तेली, नाना लाल धाकड़, फूलचंद रेगर, रामलाल सुथार, प्रकाश वैष्णव, रतन गुर्जर, भगवती प्रसाद सुवालका, सवाई राम, कैलाश राव, नंदकिशोर चारण, भागचंद गुर्जर, मैना चौधरी, सुमन पारीक, भगवती शर्मा, दीक्षा मीणा, आशा जैन, सीता मीणा, सुमन टेलर और सुशीला योगी समेत लगभग 410 मंत्रालयिक कर्मचारी शामिल रहे।

कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने समय रहते उनकी लंबित मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करने के लिए मजबूर होंगे। प्रशासनिक स्तर पर सौंपे गए इस ज्ञापन ने न केवल सरकार के समक्ष एक बड़ी चुनौती पेश की है, बल्कि विभागीय कामकाज के सुचारू संचालन पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस 'कलम डाउन' को रोकने के लिए क्या कदम उठाती है, या फिर कर्मचारियों का यह संघर्ष आने वाले समय में और विकराल रूप लेगा।

Pratahkal Newsroom

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