भीलवाड़ा में ट्रैक्टर हादसे में घायल पेंटर दीपक कोली की मौत, 10 लाख मुआवजे की मांग पर मोर्चरी में हंगामा
भीलवाड़ा के गणपतिया खेड़ा में ट्रैक्टर हादसे में घायल पेंटर दीपक कोली की मौत के बाद कोली समाज ने 10 लाख मुआवजे की मांग को लेकर मोर्चरी के बाहर प्रदर्शन किया।

तस्वीर में भीलवाड़ा के अस्पताल परिसर के बाहर सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करते कोली समाज के पुरुष और महिलाएं दिखाई दे रहे हैं, जहां पृष्ठभूमि में पुलिसकर्मी तैनात हैं।
भीलवाड़ा जिले के गणपतिया खेड़ा (फूलिया कलां) गांव में 10 जुलाई को हुए ट्रैक्टर हादसे में गंभीर रूप से घायल पेंटर दीपक कोली की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने और आर्थिक सहायता की मांग को लेकर कोली समाज के लोगों ने अस्पताल और मोर्चरी के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में समाज की महिलाएं, बुजुर्ग और युवा मौजूद रहे।
कोली समाज के सचिव मुरलीधर कोली ने मीडिया से बातचीत में बताया कि 10 जुलाई 2026 को दीपक कोली झूले पर बैठकर पेंटिंग का काम कर रहे थे। इसी दौरान सड़क से गुजर रहे एक अनियंत्रित ट्रैक्टर चालक ने तेज आवाज में गाने बजाते हुए लापरवाही से ट्रैक्टर चलाया। ट्रैक्टर का हिस्सा झूले की रस्सी में उलझ गया, जिससे दीपक करीब 22 फीट की ऊंचाई से सीधे नीचे गिर गए।
हादसे में गंभीर रूप से घायल दीपक को प्राथमिक उपचार के बाद पहले शाहपुरा, फिर महात्मा गांधी अस्पताल, भीलवाड़ा और बाद में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। पिछले 10 दिनों से उनका उपचार चल रहा था, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
दीपक कोली की मौत के बाद कोली समाज ने जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से मृतक के बुजुर्ग पिता एवं बेसहारा परिवार को 10 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की। समाज ने यह भी अपेक्षा जताई कि हादसे के जिम्मेदार ट्रैक्टर चालक और उसके परिवार की ओर से भी पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
मांगों को लेकर मोर्चरी के बाहर कोली समाज के लोगों ने धरना दिया। मौके पर महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की बड़ी संख्या में मौजूदगी रही। पुलिस प्रशासन स्थिति को संभालने और प्रदर्शनकारियों को समझाइश देने के प्रयास में जुटा रहा।
कोली समाज के सचिव मुरलीधर कोली ने कहा, "पिछले 10 दिनों से न तो ट्रैक्टर चालक का परिवार हाल-चाल पूछने आया और न ही प्रशासन की ओर से कोई सहायता मिली।" दीपक कोली की मौत के बाद मुआवजे और सहायता की मांग को लेकर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन प्रशासन के सामने एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

Pratahkal Bureau
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