भीलवाड़ा। अध्यात्म और दान-पुण्य की त्रिवेणी कहे जाने वाले मौनी अमावस्या के पावन पर्व पर वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में सेवा की एक अनुपम सरिता प्रवाहित हुई। राजस्थान जन मंच के तत्वावधान में आयोजित एक विशेष सेवा प्रकल्प के माध्यम से समाज के अंतिम छोर पर खड़े उन निर्धन परिवारों के चूल्हे रोशन किए गए, जो अभावों की मार झेल रहे हैं। काशीपुरी रोड पर आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में झुग्गी-झोपड़ी में निवासरत 90 परिवारों को राहत पहुंचाते हुए उन्हें राशन सामग्री का वितरण किया गया, जिसने न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोरा बल्कि समाज को एकजुटता का संदेश भी दिया।

धर्म और कर्म के इस संगम में हाथीभाटा आश्रम के महंत संतदास महाराज और पुर स्थित पंचमुखी हनुमान मंदिर के पुजारी मुरारी पांडे का सानिध्य प्राप्त हुआ। संतों की उपस्थिति ने इस पुनीत कार्य को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। राजस्थान जन मंच के अध्यक्ष कैलाश सोनी के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में 90 जरूरतमंद परिवारों की महिला मुखियाओं को 5-5 किलो आटे के कट्टे ससम्मान भेंट किए गए। कड़कड़ाती ठंड और आर्थिक तंगी के बीच संघर्ष कर रहे इन परिवारों के चेहरों पर झलकी मुस्कान ने संतों के उन वचनों को चरितार्थ कर दिया, जिसमें अन्न दान को सर्वोपरि माना गया है।

इस अवसर पर आशीर्वचन प्रदान करते हुए महंत संतदास महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति में अन्न दान को 'महादान' की संज्ञा दी गई है। उन्होंने शास्त्रों और पुराणों का संदर्भ देते हुए इस बात पर जोर दिया कि अमावस्या जैसी पवित्र तिथि पर किसी भूखे को भोजन कराना या अन्न देना सबसे बड़े पुण्य का कार्य है। उनके अनुसार, नर सेवा ही वास्तव में नारायण की सच्ची सेवा है। पुजारी मुरारी पांडे ने भी इस पुनीत कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास समाज की मुख्यधारा से कटे हुए लोगों को यह अहसास कराते हैं कि वे अकेले नहीं हैं।

सेवा के इस महाकुंभ में शहर के कई गणमान्य जन और समाजसेवी भी साक्षी बने। भीलवाड़ा इलेक्ट्रिक डीलर्स एसोसिएशन के संरक्षक रामपाल सोनी और बिजली विभाग के सहायक अभियंता राम मिलन यादव ने इस पहल की सराहना की। कार्यक्रम की सफलता में शिव प्रकाश चन्नाल, रामचंद्र मूंदड़ा, हार्दिक सोनी, जगदीश सेन, जय नारायण जोशी, द्वारका नुवाल, कालू धोबी, मोनू प्रजापत, विनोद जाट और किशन गाडरी सहित राजस्थान जन मंच के सभी सदस्यों ने अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई। दान और धर्म के इस समावेश ने भीलवाड़ा में मौनी अमावस्या के पर्व को ऐतिहासिक बना दिया, जो केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रहकर मानवता की सेवा का एक बड़ा उदाहरण बनकर उभरा।

Pratahkal Bureau

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