भीलवाड़ा: नगर निगम की कार्रवाई में घुमंतू महिला की झोपड़ी ध्वस्त, कलेक्टर से मुआवजे की मांग
भीलवाड़ा के पटेलनगर में 15 साल पुराना आशियाना ढहाने के बाद पांच बच्चों के साथ बेघर हुई महिला ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्याय और जमीन की गुहार लगाई।

भीलवाड़ा के पटेलनगर स्थित देवनारायण सर्किल के पास नगर निगम द्वारा झोपड़ी ध्वस्त किए जाने के बाद मलबे के पास खड़ी पीड़ित इन्द्रा बागरिया और उसके बच्चे।
भीलवाड़ा के पटेलनगर इलाके में एक गरीब घुमंतू परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पिछले 15 सालों से जिस झोपड़ी को अपना घर मानकर इन्द्रा बागरिया अपने पांच मासूम बच्चों के साथ रह रही थी, नगर निगम की कार्रवाई ने उसे मलबे में तब्दील कर दिया। अब यह परिवार भीषण गर्मी और आने वाले मानसून के डर से थर-थरा रहा है। शुक्रवार को पीडि़ता ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्याय और मुआवजे की गुहार लगाई है।
15 साल का आशियाना चंद मिनटों में हुआ साफ
देवनारायण सर्किल, याशिका हॉस्पिटल के पास रहने वाली इन्द्रा पत्नी जगदीश बागरिया ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि वह घुमंतू परिवार से ताल्लुक रखती है। वह अपने पांच छोटे-छोटे बच्चों के साथ पिछले डेढ़ दशक से इसी स्थान पर झोपड़ी बनाकर गुजर-बसर कर रही थी। इसके अलावा उसके पास रहने के लिए दुनिया में और कोई ठिकाना नहीं है।
कश्मीर से भीख मांगकर लौटी तो सब कुछ खत्म मिला
पीडि़ता ने भावुक होकर बताया कि वह अपने बच्चों का पेट पालने के लिए पिछले कुछ समय से कश्मीर में भीख मांगने गई हुई थी। जब 4-5 दिन पहले वह वापस भीलवाड़ा लौटी, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। वहां न झोपड़ी थी और न ही उसका घरेलू सामान बचा था। स्थानीय स्तर पर पूछताछ करने पर उसे पता चला कि नगर निगम की टीम ने अतिक्रमण हटाने के नाम पर उसकी झोपड़ी को ध्वस्त कर दिया और उसका सारा घरेलू सामान भी वहां से गायब हो गया।
कलेक्टर से न्याय और मुआवजे की मार्मिक गुहार
भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है और जल्द ही बरसात का मौसम शुरू होने वाला है, ऐसे में इन्द्रा अपने पांच बच्चों को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर है। कलेक्टर को सौंपे पत्र में इन्द्रा ने स्पष्ट किया कि उसके पास अब न तो रहने की जगह है और न ही दोबारा आशियाना बनाने के लिए पैसे बचे हैं। "साहब! भीख मांगकर लौटे तो आशियाना जमींदोज मिला, अब बच्चों को लेकर कहां जाएं?" इस दर्दनाक सवाल के साथ पीडि़ता ने मांग की है कि नगर निगम की इस कार्रवाई के खिलाफ निष्पक्ष जांच की जाए, उसे उचित मुआवजा दिलाया जाए और रहने के लिए जमीन उपलब्ध कराई जाए।

Pratahkal Bureau
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