औद्योगिक नगरी भीलवाड़ा में मानव संसाधन और औद्योगिक संबंध विशेषज्ञों के लिए आयोजित एक विशेष श्रम संहिता जागरूकता सेमिनार ने भविष्य की कार्यस्थल नीतियों की नई दिशा तय की है। इस महत्वपूर्ण सेमिनार में विभिन्न उद्योगों, संस्थानों और अस्पतालों से जुड़े करीब 150 विशेषज्ञों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का केंद्रीय उद्देश्य भारत सरकार द्वारा लाए गए नए श्रम कानूनों की विस्तृत जानकारी प्रदान करना और उनके कार्यस्थलों पर प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना रहा। विशेषज्ञों ने इसे नवाचार और आर्थिक सुधारों के दौर में व्यापार सुगमता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम करार दिया है।

एचआर प्रोफेशनल सोसाइटी के सचिव संजय त्रिपाठी ने संबोधन के दौरान स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने पुराने और जटिल श्रम कानूनों को सरल बनाते हुए चार नई श्रम संहिताओं में समाहित किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन परिवर्तनों को गहराई से समझना और लागू करना उद्योग तथा श्रमिक, दोनों के हितों की रक्षा के लिए अनिवार्य है। इसी क्रम में श्रम कानून सलाहकार संजय सुथार ने बताया कि कानून का निर्माण एक पक्ष है, किंतु उसे धरातल पर उतारना ही वास्तविक चुनौती है। सुथार ने जानकारी दी कि अब तक देश के 15 राज्यों में 150 से अधिक ऐसे सेमिनार आयोजित किए जा चुके हैं, जिनका लक्ष्य मानव संसाधन पेशेवरों को सशक्त बनाकर कार्यस्थल पर उत्पादकता में सुधार लाना है।

जिंदल सॉ लिमिटेड के वरिष्ठ महाप्रबंधक एवं एचआर प्रमुख विनोद माथुर ने आयोजन की सफलता के चार प्रमुख स्तंभों—आयोजक एचआर सोसाइटी, सहयोगी संस्था, मुख्य वक्ता संजय सुथार का गहन ज्ञान और जागरूक प्रतिभागियों—को रेखांकित किया। दूसरी ओर, एचआर हर्षिता दीक्षित ने कार्यक्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को सकारात्मक बताते हुए स्वीकार किया कि पुराने और नए कानूनों के मध्य संतुलन बनाना कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मानव संसाधन विभाग केवल नियमों तक सीमित न रहकर लोगों को जोड़ने और समस्याओं के समाधान की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाता है। इस सेमिनार में बीएसएल, आरएसडब्ल्यूएम, संगम, शुभ लक्ष्मी, लगनम सोना, कंचन इंडिया, जिंदल सॉ और ओस्तवाल ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित समूहों के एचआर सदस्यों की सक्रिय उपस्थिति रही। अंततः, यह सेमिनार ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ जो औद्योगिक शांति और नियमों के बेहतर अनुपालन में सहायक होगा।

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