भीलवाड़ा एनडीपीएस कोर्ट का कड़ा प्रहार: डोडा-चूरा तस्करी के दोषी को 10 साल की कठोर कैद
भीलवाड़ा की एनडीपीएस अदालत ने मादक पदार्थ तस्करी के एक चर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। 55 किलो डोडा-चूरा तस्करी के दोषी को 10 साल की कठोर सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ा। जानें इस हाई-प्रोफाइल मामले की पूरी जानकारी।

मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत भीलवाड़ा की विशिष्ट एनडीपीएस अदालत ने एक कठोर और नजीर पेश करने वाला निर्णय सुनाया है। न्यायाधीश विनोद कुमार वाजा ने अवैध अफीम डोडा-चूरा परिवहन के मामले में सुनवाई करते हुए आरोपी महेंद्र माली को दोषी करार दिया और उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। इस फैसले के साथ ही अदालत ने आरोपी पर एक लाख रुपये का आर्थिक दंड भी अधिरोपित किया है। न्याय के प्रति गंभीरता दिखाते हुए अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी अर्थदंड जमा करने में विफल रहता है, तो उसे एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
घटना का सूत्रपात 6 सितंबर 2020 को हुआ, जब बदनोर थानाधिकारी राजेंद्र ताडा अपनी टीम के साथ ब्यावर-भीलवाड़ा रोड पर नाकाबंदी कर रहे थे। उसी दौरान पुलिस को एक बिना नंबर प्लेट वाली सफेद टाटा इंडिगो कार संदिग्ध अवस्था में आती दिखाई दी। पुलिस द्वारा रोके जाने पर चालक ने अपनी पहचान भोपालगढ़ निवासी महेंद्र पुत्र सोहनराम माली के रूप में दी। तलाशी के दौरान कार की डिक्की से तीन प्लास्टिक के कट्टे बरामद किए गए, जिनमें 55 किलोग्राम अवैध अफीम डोडा-चूरा छिपाकर रखा गया था। मौके पर ही पुलिस ने मादक पदार्थ और वाहन को जब्त कर आरोपी को हिरासत में ले लिया।
न्यायिक प्रक्रिया के दौरान राज्य पक्ष की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक रेखा चौहान ने प्रभावी पैरवी की और मामले की गंभीरता को अदालत के समक्ष रखा। इस प्रकरण का एक पहलू अभी भी शेष है, क्योंकि सह-आरोपी देवेंद्र कुमार अभी भी कानून की पकड़ से दूर है, जिसके विरुद्ध धारा 173(8) सीआरपीसी के तहत जांच लंबित है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह निर्देश दिया है कि जब तक फरार सह-आरोपी की गिरफ्तारी और मुकदमे की प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो जाती, तब तक जब्तशुदा माल और संबंधित दस्तावेज पूरी तरह सुरक्षित रखे जाएंगे।
यह फैसला मादक पदार्थों के तस्करों के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। भीलवाड़ा अदालत का यह निर्णय न केवल कानून की सर्वोच्चता को स्थापित करता है, बल्कि समाज में मादक पदार्थों के दुष्प्रभावों के विरुद्ध एक मजबूत प्रहरी की भूमिका भी निभाता है। 10 साल की यह सजा इस बात का प्रमाण है कि कानून के हाथ लंबे हैं और नशीले पदार्थों के कारोबार में संलिप्त लोगों को कठोर दंड का सामना करना ही होगा।

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