भीलवाड़ा के विशेष एनडीपीएस (NDPS) न्यायालय ने मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध एक अत्यंत कठोर निर्णय सुनाते हुए समाज में स्पष्ट संदेश दिया है। अदालत ने गांजा तस्करी के एक मामले में दोषी मिट्ठू ओड को तीन वर्ष के कठोर कारावास और तीस हजार रुपये के आर्थिक जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला मादक पदार्थों के अवैध कारोबार में लिप्त तत्वों के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।

घटना का विवरण तीन जनवरी 2020 का है। उस समय सुभाषनगर थाने के उपनिरीक्षक रामपाल सिंह अपनी पुलिस टीम के साथ क्षेत्र में गश्त पर थे। पुलिस टीम जब मजिस्ट्रेट कॉलोनी के निकट विधि कॉलेज के पास पहुंची, तो वहां एक संदिग्ध व्यक्ति पुलिस को देखते ही झाड़ियों में छिपने का प्रयास करने लगा। पुलिसकर्मियों की मुस्तैदी और त्वरित कार्रवाई ने उस संदिग्ध को घेरकर रोक लिया। तलाशी के दौरान उसके पास मौजूद प्लास्टिक की बोरी से एक किलो 460 ग्राम अवैध गांजा बरामद किया गया। पूछताछ में आरोपी की पहचान मारुति कॉलोनी निवासी मिट्ठू ओड के रूप में हुई, जिसे पुलिस ने तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार कर लिया।

मामले की जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में अपना आरोप पत्र दाखिल किया। मुकदमे की पैरवी करते हुए विशिष्ट लोक अभियोजक रामस्वरूप गुर्जर ने अभियोजन पक्ष को मजबूती प्रदान की। अदालत के समक्ष आठ गवाह और 48 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए गए, जिन्होंने आरोपी के अपराध को पूरी तरह सिद्ध कर दिया। इन पुख्ता सबूतों और साक्ष्यों का संज्ञान लेते हुए माननीय विशेष न्यायाधीश ने आरोपी मिट्ठू ओड को दोषी ठहराते हुए सजा का ऐलान किया।

न्यायालय का यह निर्णय न केवल अपराध की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि मादक पदार्थों की तस्करी को जड़ से मिटाने की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है। कानून की इस सख्त कार्रवाई ने यह सिद्ध कर दिया है कि समाज को नशे की दलदल से मुक्त रखने के लिए न्यायपालिका पूरी तरह से सक्रिय है।

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