भीलवाड़ा MGH अस्पताल में एक ही रात दो प्रसूताओं की मौत, अत्यधिक रक्तस्राव और कार्डियक अरेस्ट ने छीनी दो जिंदगियां
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय (MGH) के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र (MCH) में एक ही रात दो प्रसूताओं की मौत से सनसनी फैल गई। एक महिला शाहपुरा से गंभीर हालत में रेफर होकर पहुंची थी, जबकि दूसरी की नॉर्मल डिलीवरी के बाद अचानक तबीयत बिगड़ गई। जानिए दोनों मामलों में क्या हुआ।

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय (MGH) परिसर स्थित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र (MCH) में बीती रात दो प्रसूताओं की मौत से मातृत्व की खुशियां मातम में बदल गईं। नए शिशुओं की किलकारियों के बीच घटी इन दो दुखद घटनाओं ने परिजनों के साथ-साथ अस्पताल में मौजूद हर व्यक्ति को झकझोर दिया। दोनों महिलाओं की मौत गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं के कारण हुई। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के लिए जीवन-रक्षक उपचार किए, लेकिन सभी प्रयास विफल रहे।
पहला मामला शाहपुरा की प्रसूता सुगना का है। प्रसव के बाद उसे अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लीडिंग) होने लगा था। गंभीर हालत में उसे शाहपुरा से भीलवाड़ा के एमजीएच स्थित एमसीएच विंग रेफर किया गया। अस्पताल पहुंचने तक उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो चुकी थी। उसकी पल्स और ब्लड प्रेशर (BP) दोनों नहीं मिल रहे थे। डॉक्टरों की टीम ने बिना देर किए उसे आईसीयू में वेंटिलेटर पर रखा और जीवन रक्षक दवाइयों के साथ उपचार शुरू किया। चिकित्सकों ने उसे बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई। डॉक्टरों की हर मुमकिन कोशिश के बावजूद सुगना जीवन की जंग हार गई और उसका नवजात मां के आंचल की छांव से महरूम रह गया।
दूसरा मामला मूलतः कोटड़ी क्षेत्र के कोठाज तथा हाल निवासी पटेलनगर की रानी, पत्नी भूरा बंजारा, का है। रानी की एमजीएच में सामान्य (नॉर्मल) डिलीवरी हुई थी। बच्चे के जन्म के बाद करीब एक घंटे तक उसकी स्थिति सामान्य रही और परिजन खुशियां मना रहे थे। इसी दौरान अचानक रानी को पोस्टपार्टम हेमरेज यानी अत्यधिक रक्तस्राव शुरू हो गया।
स्थिति बिगड़ते ही डॉक्टरों की विशेष टीम मौके पर पहुंची और ब्लीडिंग रोकने के लिए सभी आवश्यक मेडिकल प्रोटोकॉल अपनाए। कुछ समय के लिए उसकी हालत में सुधार भी दिखाई दिया, जिससे परिजनों में उम्मीद जगी, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव से पड़े शारीरिक तनाव को उसका शरीर सहन नहीं कर सका। उसे अचानक कार्डियक अरेस्ट आया और उसकी मौत हो गई।
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, दोनों प्रसूताओं में से किसी का भी कोई ऑपरेशन या सर्जरी नहीं हुई थी। पहले मामले में शाहपुरा से अत्यधिक रक्तस्राव के कारण पल्सलेस स्थिति में रेफर होकर आने के बाद उपचार के दौरान मौत हुई, जबकि दूसरे मामले में सामान्य डिलीवरी के बाद अचानक अनपेक्षित पोस्टपार्टम हेमरेज और कार्डियक कोलैप्स जानलेवा साबित हुआ।
चिकित्सकों का कहना है कि दोनों ही घटनाएं गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं का परिणाम थीं। डॉक्टरों ने दोनों महिलाओं की जान बचाने के लिए पूरा प्रयास किया, लेकिन मातृत्व की इस जंग में दोनों माताओं का साथ छूट गया।

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