भीलवाड़ा एमजी अस्पताल में 10 दिन में 5 प्रसूताओं की मौत, संक्रमित ओटी सील होने से मचा हड़कंप
भीलवाड़ा के एमजी अस्पताल के एमसीएच विंग में 10 दिन में 5 प्रसूताओं की मौत के बाद संक्रमित ओटी सील कर दिया गया। दवाइयों और सर्जिकल सामग्री की जांच के लिए नमूने जयपुर भेजे गए।

तस्वीर में भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय परिसर में स्थित मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (MCH) विंग की बहुमंजिला इमारत और उसका मुख्य द्वार दिखाई दे रहा है।
भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय के मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग में सिजेरियन डिलीवरी के बाद लगातार हो रही प्रसूताओं की मौतों ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। अस्पताल की संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल तब खड़े हो गए, जब ऑपरेशन थिएटर की संक्रमण जांच (कल्चर टेस्ट) रिपोर्ट पॉजिटिव आई। रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से ऑपरेशन थिएटर को आगामी आदेश तक पूरी तरह बंद (सील) कर दिया।
मार्च 2026 से अब तक इस विंग में 9 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है। इनमें से अकेले जुलाई के शुरुआती 10 दिनों में ही 5 महिलाओं की जान गई। लगातार सामने आ रही इन मौतों के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली और संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
चारों ओर से उठ रहे सवालों और बढ़ते जनाक्रोश के बीच महात्मा गांधी चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण गौड़ ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा, “यह बेहद गंभीर और दुखद विषय है। शुरुआती कल्चर टेस्ट में ओटी के भीतर संक्रमण (इन्फेक्शन) की पुष्टि हुई है। मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए हमने तुरंत प्रभाव से ऑपरेशन थिएटर को सील कर दिया है। जब तक ओटी पूरी तरह से संक्रमण मुक्त नहीं हो जाता और नई रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आ जाती, तब तक यहाँ कोई नया ऑपरेशन नहीं किया जाएगा।”
डॉ. अरुण गौड़ ने बताया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्च स्तरीय आंतरिक कमेटी का गठन किया गया है। साथ ही ऑपरेशन के दौरान उपयोग में ली जाने वाली जीवन रक्षक दवाइयों, एनेस्थीसिया के इंजेक्शन और टांके लगाने वाले सर्जिकल धागों के सैंपल सील कर दिए गए हैं। इन सभी नमूनों को एडवांस फॉरेंसिक और लैब जांच के लिए जयपुर भेजा गया है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मौतों के पीछे कहीं कोई तकनीकी या मेडिकल डिफेक्ट तो जिम्मेदार नहीं था।
पिछले कुछ दिनों में 5 जुलाई को शिमला गुर्जर (28), 7 जुलाई को फोरी देवी, 8 जुलाई को इशा पांडे, 9 जुलाई को दिव्या और 10 जुलाई को पोटला निवासी संगीता जीनगर (32) की सिजेरियन के बाद तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। संगीता जीनगर की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में प्रदर्शन और हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने समय रहते मरीजों की बिगड़ती हालत पर ध्यान नहीं दिया तथा उन्हें संक्रमित वार्डों में रखकर उनकी जान को जोखिम में डाला।
दूसरी ओर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इन मौतों का एकमात्र कारण संक्रमण नहीं है। प्रशासन के अनुसार प्रसूताओं की मौत पल्मोनरी एम्बोलिज्म (फेफड़ों में खून का थक्का जमना), एस्पिरेशन, गंभीर एनीमिया (खून की भयंकर कमी), पीआईएच और एक्लेम्पसिया (दौरे पड़ना) जैसी जटिल चिकित्सा स्थितियों के कारण हुई। हालांकि इसी बीच ऑपरेशन थिएटर को सील किए जाने और दवाइयों सहित अन्य सामग्री के नमूने जांच के लिए जयपुर भेजे जाने से मामले को लेकर सवाल लगातार बने हुए हैं।
भीलवाड़ा का यह मामला राजस्थान की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सवाल खड़े कर रहा है। मई 2026 में कोटा के सरकारी अस्पताल में 5 प्रसूताओं की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। जून 2026 में बीकानेर में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद 6 महिलाओं की किडनी फेल होने का मामला सामने आया, जिनमें से दो महिलाओं की मौत हो गई। जुलाई 2026 में भीलवाड़ा का मामला सामने आने के बीच शुक्रवार को बांसवाड़ा के जिला अस्पताल में मात्र दो घंटे के भीतर 2 प्रसूताओं की मौत हो गई।
अब पूरे मामले में यह जांच का विषय है कि भीलवाड़ा की 9 प्रसूताओं की मौतों के पीछे संक्रमित ऑपरेशन थिएटर, मेडिकल सप्लाई में संभावित खामी या चिकित्सकीय स्तर पर कोई अन्य कारण जिम्मेदार था। जयपुर भेजे गए नमूनों की जांच रिपोर्ट और गठित जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले में जवाबदेही और आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी।

Pratahkal Bureau
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