भीलवाड़ा: बदनामी के दंश और धमकियों से हारी जिंदगी, जोजर में विवाहिता ने लगाया मौत को गले; नामजद महिला पर केस दर्ज
भीलवाड़ा के जोजर गांव में मानसिक प्रताड़ना और बदनामी से तंग आकर विवाहिता लालीबाई ने की आत्महत्या। पति मांगीलाल बलाई ने आरोपी धापू के खिलाफ दर्ज कराया मामला। शक्करगढ़ सीएचसी में पोस्टमार्टम में हुई 6 घंटे की देरी ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की खोली पोल। पढ़िए इस हृदयविदारक घटना की पूरी रिपोर्ट।

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के शक्करगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत जोजर गांव में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां सामाजिक बदनामी और निरंतर मानसिक प्रताड़ना के बोझ तले दबी एक विवाहिता ने मौत का रास्ता चुन लिया। यह मामला महज एक आत्महत्या नहीं, बल्कि उस सामाजिक उत्पीड़न की पराकाष्ठा है जिसने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दीं। मृतका लालीबाई के पति मांगीलाल बलाई की शिकायत पर पुलिस ने अब एक नामजद महिला के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं।
इस पूरे प्रकरण की जड़ें पिछले कई महीनों से चली आ रही प्रताड़ना में छिपी हैं। मांगीलाल बलाई द्वारा पुलिस को सौंपी गई रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि धापू नामक महिला उनकी पत्नी लालीबाई को लंबे समय से बदनाम कर रही थी। विवाद इतना गहरा चुका था कि इसे सुलझाने के लिए ग्रामीण स्तर पर कई बार पंचायतें बुलाई गईं और समझाइश के दौर चले, लेकिन आरोपी महिला के हौसले पस्त नहीं हुए। बताया जा रहा है कि सुलह की तमाम कोशिशों के बावजूद लालीबाई के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियों और प्रताड़ना का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा।
घटनाक्रम ने 9 जनवरी को तब गंभीर मोड़ ले लिया जब आरोपी महिला धापू ने लालीबाई को एक बार फिर सार्वजनिक रूप से बदनाम करने की सीधी धमकी दी। इस अंतिम प्रहार ने लालीबाई को गहरे मानसिक अवसाद में धकेल दिया। लोक-लाज और निरंतर हो रहे अपमान से टूटी लालीबाई ने उसी शाम अपने घर में फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। इस घटना के बाद पूरे गांव में मातम और आक्रोश का माहौल व्याप्त हो गया।
इस त्रासदी के बाद स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता भी उजागर हुई। शुक्रवार देर रात जब शव को पोस्टमार्टम के लिए शक्करगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, तो वहां अव्यवस्थाओं का बोलबाला दिखा। अस्पताल में वार्ड बॉय की अनुपलब्धता के कारण पोस्टमार्टम की प्रक्रिया करीब छह घंटे तक अधर में लटकी रही। इस कड़ाके की ठंड में शोकाकुल परिजन और ग्रामीण घंटों तक अस्पताल परिसर में परेशान होते रहे, जो स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का आक्रोश केवल इस घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि वे शक्करगढ़ सीएचसी में स्टाफ की भारी कमी को लेकर भी प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। बार-बार शिकायतों के बावजूद व्यवस्थाओं में सुधार न होना अब जन-आक्रोश का कारण बन रहा है। फिलहाल, पुलिस ने मांगीलाल की रिपोर्ट के आधार पर आरोपी महिला धापू के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की कमान संभाल ली है। कानून की चौखट पर अब इस बात का फैसला होना शेष है कि क्या लालीबाई को न्याय मिल पाएगा, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मानसिक प्रताड़ना किसी भी शारीरिक चोट से कहीं अधिक घातक हो सकती है।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara
नाम: राजेश तोषनीवाल
वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)
कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)
बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस
परिचय
राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।
पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)
राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।
- वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
- इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।
शैक्षणिक योग्यता (Education)
- स्नातक (Graduate)
- डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)
