भीलवाड़ा: रामनारायण हत्याकांड में बड़ी कार्रवाई, मुख्य आरोपियों सहित शरणदाता भी गिरफ्तार
भीलवाड़ा के रायला में हुए सनसनीखेज रामनारायण जाट हत्याकांड का पुलिस ने पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपी कमलेश धाकड़, मिठुलाल जाट और सहयोगी देवेन्द्र सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। जमीन विवाद की रंजिश में कार से कुचलकर की गई इस निर्मम हत्या के सभी पहलुओं और आरोपियों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट यहाँ पढ़ें।

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के रायला थाना क्षेत्र में नववर्ष की पूर्व संध्या पर हुए सनसनीखेज रामनारायण हत्याकांड में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। कानून के लंबे हाथों ने आखिरकार इस जघन्य अपराध के मुख्य किरदारों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। पुलिस ने वारदात को अंजाम देकर फरार चल रहे मुख्य आरोपी कमलेश धाकड़ और मिठुलाल जाट को गिरफ्तार करने के साथ ही, उन्हें कानून से बचाने और शरण देने के आरोपी देवेन्द्र सिंह भाटी को भी धर दबोचा है। इस मामले में पुलिस पूर्व में ही सत्यनारायण जाट को गिरफ्तार कर चुकी है, जिससे कड़ी से कड़ी जुड़ती चली गई।
इस खौफनाक वारदात की पटकथा 31 दिसंबर 2025 की रात को लिखी गई थी। लांबिया कला निवासी किशन जाट द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के अनुसार, उनके 42 वर्षीय पिता रामनारायण जाट उस काली रात करीब 9:30 बजे खाना खाकर अपनी मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे। उन्हें इस बात का जरा भी इल्म नहीं था कि महाकाल फैक्ट्री के पास मौत घात लगाए बैठी है। पूर्व नियोजित साजिश के तहत हमलावरों ने एक ब्लैक-ग्रे रंग की वरना कार से पीछे से रामनारायण की मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मारी। आरोपियों की दरिंदगी यहीं खत्म नहीं हुई; उन्होंने कार को पीछे लिया और दोबारा उन्हें कुचलने का प्रयास किया। घसीटते हुए उन्हें बिजली के खंभे से टकरा दिया गया, जिससे रामनारायण ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। आरोपी अपनी कार को मौके पर ही छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए थे।
पुलिस की गहन तफ्तीश में यह बात निकलकर सामने आई कि इस नृशंस हत्या की जड़ें एक पुराने जमीनी विवाद में गहरी धंसी हुई थीं। भंवरलाल जाट और मृतक के परिवार के बीच लंबे समय से चल रही रंजिश ने प्रतिशोध का ऐसा रूप ले लिया कि सत्यनारायण जाट ने अपने मित्रों कमलेश धाकड़ और मिठुलाल जाट के साथ मिलकर रामनारायण को रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली। वारदात से पहले बाकायदा रेकी की गई और सही समय का इंतजार किया गया ताकि हत्या को महज एक सड़क दुर्घटना का रूप दिया जा सके। वारदात के बाद फरार हुए आरोपियों को 22 वर्षीय देवेन्द्र सिंह भाटी ने छिपने के ठिकाने और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए थे।
पकड़े गए आरोपियों में 32 वर्षीय कमलेश धाकड़ (निवासी गणेशपुरा, चित्तौड़गढ़), 37 वर्षीय मिठुलाल जाट (निवासी अरनिया पंथ, शम्भूपुरा) और मददगार देवेन्द्र सिंह भाटी (निवासी जसवंतपुरा, भीलवाड़ा) शामिल हैं। भीलवाड़ा पुलिस अब इस मामले के हर पहलू को खंगाल रही है कि आखिर इस साजिश के पीछे और किन सफेदपोश चेहरों का हाथ हो सकता है। यह मामला न केवल एक परिवार के मुखिया की हत्या का है, बल्कि समाज में आपसी रंजिश के चलते बढ़ते अपराधों की भयावहता को भी दर्शाता है। पुलिस की सक्रियता ने फिलहाल आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है, लेकिन मामले में आगे होने वाले खुलासों पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं।

Pratahkal Bureau
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