भीलवाड़ा। राजस्थान के वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में लोकतंत्र और ग्रामीण अधिकारों की रक्षा के लिए एक नए राजनीतिक संग्राम का उदय हुआ है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र की मोदी सरकार द्वारा मनरेगा कानून में किए गए बदलावों के विरोध में 10 जनवरी से 45 दिवसीय “मनरेगा बचाओ अभियान” का औपचारिक बिगुल फूंक दिया है। इस अभियान के तहत कांग्रेस कार्यकर्ता 'गांव-गांव और वार्ड-वार्ड' की रणनीति अपनाते हुए आम जनता के बीच जाकर केंद्र सरकार की नीतियों के विरुद्ध जनमत तैयार करेंगे।

शहर जिला कांग्रेस कमेटी के तत्वावधान में आयोजित एक महत्वपूर्ण पत्रकार वार्ता के दौरान इस व्यापक आंदोलन की रूपरेखा साझा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे जिलाध्यक्ष शिवराम खटीक (जीपी) ने केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान सत्ता "जनविरोधी नीतियों की फैक्ट्री" बन चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत को मिला एक संवैधानिक अधिकार है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर समाप्त नहीं होने देगी।

आंदोलन का विस्तृत रोडमैप और चरणबद्ध कार्यक्रम

जिलाध्यक्ष शिवराम खटीक ने आंदोलन की गंभीरता को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि यह संघर्ष 25 फरवरी तक अनवरत चलेगा। अभियान की शुरुआत 11 जनवरी को भीलवाड़ा में आयोजित होने वाले एक दिवसीय उपवास से होगी। इसके पश्चात 12 से 29 जनवरी तक वार्ड प्रतिनिधियों और मनरेगा श्रमिकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा। 30 जनवरी को शहीद दिवस के पावन अवसर पर समूचे जिले में वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरने दिए जाएंगे।

आंदोलन का दूसरा चरण 21 जनवरी से 6 फरवरी तक जिला स्तरीय प्रदर्शनों के रूप में दिखेगा। वहीं, 7 फरवरी से 15 फरवरी के बीच कांग्रेस कार्यकर्ता राजस्थान विधानसभा का घेराव कर राज्य सरकार को भी कटघरे में खड़ा करेंगे। इस 45 दिवसीय महाभियान का समापन 16 से 25 फरवरी के बीच अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में होने वाली विशाल जोनल रैलियों के साथ होगा।

प्रमुख नेतृत्व और एकजुटता का संदेश

इस प्रेस वार्ता में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों की उपस्थिति ने पार्टी की एकजुटता को प्रदर्शित किया। कार्यक्रम में शाहपुरा से कांग्रेस प्रत्याशी नरेंद्र रैगर, पूर्व जिलाध्यक्ष अक्षय त्रिपाठी, अनिल डांगी, संजय पेड़ीवाल, धर्मेंद्र पारीक, और मनोज पालीवाल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। नेताओं ने एक स्वर में मांग की कि मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए, मजदूरों को समय पर पूर्ण भुगतान मिले और ग्रामीण बेरोजगारी की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए।

यह आंदोलन न केवल भीलवाड़ा बल्कि पूरे प्रदेश की राजनीति में एक नई हलचल पैदा करने वाला साबित हो सकता है। कांग्रेस का लक्ष्य स्पष्ट है—सड़क से लेकर संसद तक मनरेगा के अधिकारों की सुरक्षा करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इस कानून को कमजोर करने वाली शक्तियों को चुनौती देना।

Pratahkal Bureau

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