न्याय न मिलने पर इच्छा मृत्यु की मांग, कलेक्ट्रेट के सामने आमरण अनशन पर बैठे किशन भट्ट
भीलवाड़ा में जवाहर नगर निवासी किशन भट्ट प्लॉट विवाद में न्याय की मांग को लेकर कलेक्ट्रेट के सामने आमरण अनशन पर बैठे हैं। उन्होंने पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने और धमकियों के बावजूद जांच न करने के आरोप लगाए हैं।

तस्वीर में भीलवाड़ा कलेक्ट्रेट के सामने हाथों में बैनर लिए आमरण अनशन पर बैठे जवाहर नगर निवासी किशन भट्ट दिखाई दे रहे हैं।
भीलवाड़ा में न्याय की मांग को लेकर जवाहर नगर निवासी किशन भट्ट कलेक्ट्रेट के सामने आमरण अनशन पर बैठ गए हैं। प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली से परेशान किशन भट्ट ने मीडिया के सामने अपनी पीड़ा रखते हुए इच्छा मृत्यु की मांग की है। उनका आरोप है कि एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा धमकियां दिए जाने के बावजूद पुलिस उचित कार्रवाई नहीं कर रही है।
किशन भट्ट के अनुसार, उन्होंने करीब एक साल पहले जवाहर नगर क्षेत्र में 25x40 आकार का एक भूखंड खरीदा था। इसका सौदा करीब 8 से 9 लाख रुपये में तय हुआ था। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने विक्रेता रमेश उर्फ रामा उस्ताद को पूरे 8 लाख रुपये दे दिए थे। इसके बाद विक्रेता ने जल्द रजिस्ट्री कराने का आश्वासन दिया था।
आरोप है कि बाद में आरोपी ने उक्त प्लॉट किसी अन्य व्यक्ति को देने की बात कहकर टालमटोल शुरू कर दी और प्लॉट किसी महिला के नाम करवा दिया। किशन भट्ट का कहना है कि जब उन्होंने अपने पैसे या प्लॉट की मांग की तो आरोपी पक्ष ने उन्हें डराना-धमकाना शुरू कर दिया।
पीड़ित के अनुसार, 27-28 जुलाई को आरोपी ने उन्हें 100 फीट रोड पर रोककर डराया-धमकाया। इस दौरान अड़े-तड़े समझौतों के तहत 2.5 लाख रुपये में मामला रफा-दफा करने का दबाव बनाया गया, लेकिन किशन भट्ट ने पैसे लेने से इंकार कर दिया।
किशन भट्ट का आरोप है कि लगातार मिल रही धमकियों और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर वह पूर्व में डिप्रेशन में आकर जहर खा चुके हैं। हालांकि, उस समय उनकी जान बच गई। उनका कहना है कि इस संबंध में गांधीनगर थाने में प्रकरण दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने न तो कोई गहन अनुसंधान किया और न ही आरोपियों से पूछताछ की।
पीड़ित ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आरोपियों को थाने में बैठाकर चाय-सिगरेट पिलाई जा रही है, जबकि उनसे ही सबूत जुटाने की बात कही जा रही है।
किशन भट्ट का कहना है कि उन्होंने मामले को लेकर कलेक्टर और एसपी कार्यालय तक गुहार लगाई, लेकिन न्याय नहीं मिलने के कारण अब उनके सामने कोई विकल्प नहीं बचा है। इसी के चलते उन्होंने कलेक्ट्रेट के सामने आमरण अनशन शुरू किया है।
अनशन के दौरान किशन भट्ट के हाथों में “मेरी मेहनत की कमाई लौटाओ, या मुझे इच्छा मृत्यु दो, आमरण अनशन” और “न्याय नहीं तो जीने का अधिकार भी नहीं” लिखे बैनर हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उनकी गाढ़ी कमाई वापस दिलाई जाए। अब उनकी मांग और लगाए गए आरोपों पर प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

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