भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले में बेखौफ बदमाशों ने पुलिसिया इकबाल को खुली चुनौती देते हुए कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं। अपराधी अब इस कदर दुस्साहसी हो चुके हैं कि उन्हें पुलिस की मौजूदगी का रत्ती भर भी भय नहीं रहा। इसका ज्वलंत प्रमाण रायला थाना क्षेत्र में देखने को मिला, जहां पुलिस थाने की नाक के नीचे महज 300 मीटर की दूरी पर स्थित एक सूने मकान को चोरों ने दिनदहाड़े अपना निशाना बनाया। शातिर चोर घर की तिजोरी खंगालते हुए ढाई लाख रुपये की नकदी और लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात समेटकर रफूचक्कर हो गए। इस सनसनीखेज वारदात ने न केवल पुलिस की गश्त प्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, बल्कि स्थानीय निवासियों के मन में असुरक्षा की गहरी भावना पैदा कर दी है।

वारदात की पटकथा बुधवार दोपहर को उस वक्त लिखी गई जब 75 वर्षीय बुजुर्ग प्रभूलाल सुवालका के परिवार के अन्य सदस्य किसी कार्यवश गांव गए हुए थे। घर पर अकेले मौजूद प्रभूलाल दोपहर करीब दो बजे अपनी साइकिल में हवा भरवाने के उद्देश्य से पास की एक दुकान पर निकले थे। नियति का खेल देखिए कि रास्ते में कुछ परिचितों से भेंट होने के कारण वे बातचीत में मशगूल हो गए और उन्हें घर लौटने में मात्र 45 मिनट का विलंब हो गया। लेकिन चोरों की फुर्ती का आलम यह था कि उन्होंने इन चंद मिनटों के अंतराल में ही पूरे घर को खंगाल डाला। जब प्रभूलाल वापस लौटे तो मुख्य द्वार का टूटा हुआ ताला और भीतर बिखरा हुआ सामान देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।

पीड़ित प्रभूलाल सुवालका ने बदहवास स्थिति में जब घर की तलाशी ली, तो पाया कि चोरों ने बड़ी ही सफाई से कपड़ों के नीचे छिपाकर रखी गई ढाई लाख रुपये की नकदी पर हाथ साफ कर दिया है। इसके अलावा अलमारी में रखे करीब तीन तोला सोने के आभूषण और लगभग 800 ग्राम चांदी के जेवरात भी गायब थे। दिनदहाड़े हुई इस चोरी की सूचना मिलते ही रायला थाना पुलिस में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने प्रभूलाल की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया है और अब क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला जा रहा है ताकि संदिग्धों की पहचान की जा सके।

इस वारदात के बाद से समूचे रायला क्षेत्र में रोष और दहशत का माहौल व्याप्त है। स्थानीय नागरिकों का तर्क है कि यदि पुलिस थाने से महज 300 मीटर की दूरी पर स्थित मकान ही सुरक्षित नहीं हैं, तो दूरदराज के रिहायशी इलाकों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? यह घटना भीलवाड़ा पुलिस के लिए एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है, क्योंकि दिन के उजाले में घनी आबादी वाले क्षेत्र में इस तरह की वारदात को अंजाम देना अपराधियों के बढ़ते मनोबल और पुलिस की कथित शिथिलता की ओर इशारा करता है। फिलहाल, पुलिस की टीमें चोरों की तलाश में दबिश दे रही हैं, लेकिन इस घटना ने खाकी की कार्यप्रणाली को जनता के कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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