भीलवाड़ा की पालड़ी स्थित राजकीय बाल सम्प्रेषण एवं किशोर गृह की चहारदीवारी के भीतर क्या किशोरों को उनके अधिकारों का पूर्ण लाभ मिल रहा है? इसी अहम सवाल का जवाब तलाशने के लिए राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशानुसार जिला एवं सेशन न्यायाधीश अभय जैन ने गृह का औचक निरीक्षण किया। इस आकस्मिक दौरे ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी, क्योंकि न्यायाधीश ने न केवल फाइलों का अवलोकन किया, बल्कि धरातल पर मौजूद व्यवस्थाओं की भी गहनता से पड़ताल की।

निरीक्षण के दौरान जिला एवं सेशन न्यायाधीश अभय जैन ने प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट विभा आर्य से किशोरों के लंबित चल रहे मामलों की विस्तृत जानकारी ली और उनके शीघ्र निस्तारण पर जोर दिया। इसके बाद न्यायाधीश ने गृह अधीक्षक गौरव सारस्वत के साथ मिलकर बच्चों के स्वास्थ्य, चिकित्सा सुविधाओं और प्रतिदिन उपलब्ध कराए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की समीक्षा की। इस निरीक्षण के दौरान सचिव रश्मि आर्य भी मौजूद रहीं, जिन्होंने अधीक्षक को स्पष्ट शब्दों में निर्देशित किया कि किशोरों के भोजन शेड्यूल का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी प्रकार की कोताही को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अपनी इस निरीक्षण यात्रा के दौरान न्यायाधीश अभय जैन ने बालकों के हितों की रक्षा, उनके पुनर्वास और परिसर में स्वच्छता के उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। यह औचक निरीक्षण न केवल प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में एक कदम था, बल्कि किशोरों के मानवाधिकारों और उनके बेहतर भविष्य के प्रति न्यायपालिका की गंभीरता को भी रेखांकित करता है। प्रशासन अब इन निर्देशों के अनुपालन के लिए जुट गया है, जिससे गृह में रहने वाले किशोरों के जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार की उम्मीद जगी है।

Pratahkal Newsroom

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