भक्तामर भक्ति से गूंजा भीलवाड़ा: 48 दिवसीय अखंड महाआराधना अपने अंतिम चरण में, उमड़ा जनसैलाब
भीलवाड़ा के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में चल रही 48 दिवसीय अखंड भक्तामर महाआराधना अपने समापन के करीब है। भक्ति और श्रद्धा के इस अनूठे संगम में उमड़े जनसैलाब और 18 जून को होने वाले भव्य समापन समारोह की संपूर्ण जानकारी के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट।

भीलवाड़ा के शास्त्री नगर स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भक्तामर महाआराधना के दौरान उपस्थित श्रद्धालु, समापन समारोह 18 जून को आयोजित होगा।
शास्त्री नगर स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर इन दिनों एक अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है। विगत 1 मई से प्रारंभ हुई 48 दिवसीय अखंड भक्तामर महाआराधना आज अपने 46वें दिन में प्रवेश कर चुकी है, जिसके साथ ही संपूर्ण भीलवाड़ा शहर का वातावरण भक्तिमय हो गया है। इस विराट अनुष्ठान ने समाज के हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोते हुए धर्म की अविरल धारा प्रवाहित की है।
इस महाआयोजन की विशेषता इसकी सादगी और निश्छल भक्ति है। बिना किसी दिखावे, कृत्रिम संगीत या माइक के शोर के, श्रद्धालु अपनी दैनिक दिनचर्या से समय निकालकर मंदिर पहुँच रहे हैं और भक्तामर स्तोत्र के श्लोकों में तल्लीन होकर आत्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं। इस आयोजन की प्रेरणा श्री छगनलाल जी टोंग्या के संकल्प से उपजी, जिसे भीलवाड़ा के दिगंबर जैन समाज ने अपनी सामूहिक जिम्मेदारी समझते हुए मूर्त रूप दिया है। विगत डेढ़ माह से जारी इस आराधना में समाज की हर कॉलोनी और हर आयु वर्ग की भागीदारी ने इसे एक ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया है।
विजय झांझरी के अनुसार, यह आयोजन समाज में सकारात्मक परिवर्तन और सद्भाव का संवाहक बना है। उन्होंने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया, जहाँ लोग नकारात्मकता को त्यागकर शुभ और सात्विक भावों की ओर अग्रसर हुए हैं। प्रवीण चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि इस महाअनुष्ठान का समापन 18 जून को भव्य रूप में होगा। प्रातः 5 बजे भक्तामर स्तोत्र का अंतिम विशेष पाठ आयोजित किया जाएगा, जिसमें पुरुष श्रद्धालु शुद्ध श्वेत वस्त्रों में और महिलाएँ केसरिया साड़ी में सम्मिलित होंगी। प्रातः 6 बजे त्रिलोकीनाथ भगवान की पालकी यात्रा निकाली जाएगी, जिसके पश्चात 48 महिलाओं द्वारा जिनवाणी यात्रा, सहस्रनाम मंत्रावली अभिषेक, शांतिधारा, भक्तामर महामंडल विधान और हवन पूर्णाहुति जैसे धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे।
यह अखंड आराधना केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भीलवाड़ा की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना का एक जीवंत उदाहरण बनकर उभरी है। जैसे-जैसे समापन की घड़ियाँ निकट आ रही हैं, आयोजन समिति ने उन सभी श्रद्धालुओं से सपरिवार पधारने का आग्रह किया है जो अभी तक इस भक्ति महाकुंभ का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित यह अनुष्ठान निस्संदेह आने वाले समय में भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

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