भीलवाड़ा: जगदीश सिंह दरोगा की मौत पर धरना, भ्रष्टाचार की शिकायत और अतिक्रमण पर कार्रवाई
भीलवाड़ा में मारपीट से घायल व्यक्ति की मौत के बाद मोर्चरी पर धरना जारी, वहीं मुकनपुरिया में भ्रष्टाचार की शिकायत और शहर में अवैध अतिक्रमण ध्वस्त किए गए।

भीलवाड़ा जिला अस्पताल की मोर्चरी के बाहर जगदीश सिंह दरोगा की मृत्यु के बाद आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर धरने पर बैठे परिजन और समाज के लोग।
भीलवाड़ा | मांडल थाना क्षेत्र के चतरपुरा गांव में एक फरवरी को हुई गंभीर मारपीट की घटना में घायल हुए जगदीश सिंह दरोगा की मंगलवार रात उदयपुर के एक अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके बाद परिजन और समाजजन आरोपितों की गिरफ्तारी सहित आठ सूत्रीय मांगों को लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी पर धरने पर बैठ गए। गुरुवार को धरना दूसरे दिन भी जारी रहा और इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हो गईं।
घटना का विवरण और विवाद का कारण
- जगदीश सिंह के पुत्र हिम्मत सिंह पर आरोप था कि चार से पांच दिन पहले वह एक युवती को अपने साथ ले गया था।
- इसी मामले को लेकर एक फरवरी की शाम लडक़ी पक्ष द्वारा चारभुजानाथ मंदिर में बैठक बुलाई गई।
- आरोप है कि जगदीश सिंह के बैठक में उपस्थित नहीं होने से नाराज लोगों की भीड़ उनके घर पहुंच गई।
- वहां परिवार के साथ मारपीट, तोडफ़ोड़ और आगजनी की गई।
बताया जा रहा है कि जगदीश सिंह को घर से घसीटकर बाहर लाया गया और बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। गंभीर हालत में उन्हें पहले स्थानीय स्तर पर उपचार दिया गया, बाद में उदयपुर रेफर किया गया, जहां मंगलवार रात उन्होंने दम तोड़ दिया।
प्रशासनिक वार्ता और वर्तमान स्थिति
शव को भीलवाड़ा लाने के बाद परिजन और समाज के लोगों ने बुधवार सुबह मोर्चरी के बाहर धरना शुरू कर दिया। उनकी मांग है कि "सभी आरोपितों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और मामले में कठोर कार्रवाई हो।"
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने परिजनों से वार्ता की, लेकिन देर शाम तक कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके चलते गुरुवार को भी धरना जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि "जब तक आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक वे पोस्टमार्टम नहीं करवाएंगे।" स्थिति को देखते हुए अस्पताल परिसर में पुलिसकर्मी तैनात किये गये है और प्रशासन मामले पर नजर बनाए हुए है। बता दें कि मामले में पुलिस अब तक तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। शेष आरोपित फरार बताये जा रहे हैं।
ग्राम पंचायत मुकनपुरिया में फर्जी मस्टरोल और राशि हड़पने का आरोप
भीलवाड़ा। मांडलगढ़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत मुकनपुरिया के अंतर्गत पीथाजी का खेड़ा, सांडगांव व देबीसिंहजी का खेड़ा के आधा दर्जन लोगों ने ग्राम पंचायत के सरपंच, ग्राम विकास अधिकारी एवं अन्य कार्मिकों के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर के नाम अतिरिक्त जिला कलेक्टर को गुरुवार को शिकायत दी। इन लोगों ने अपने नाम पर स्वीकृत कार्यों की राशि बिना सहमति उठाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।
शिकायत में बताया गया कि शिकायतकर्ताओं के खेत पर मेडबंदी, तालाब मिट्टी एवं पशु आश्रय स्थल से जुड़े कार्य वर्ष 2023-24 में स्वीकृत किए गए थे। आरोप है कि इन कार्यों के लिए स्वीकृत राशि बिना किसी जानकारी या सहमति के निकाल ली गई। इनका कहना है कि न तो उनसे कोई अनुमति ली गई और न ही कार्य वास्तविक रूप से करवाए गए।
- आरोप: फर्जी तरीके से मस्टरोल तैयार कर सरपंच अथवा प्रशासक के परिवारजनों और अन्य रिश्तेदारों के नाम जोडक़र राशि उनके खातों में डाली गई और बाद में उसे खुर्दबुर्द कर दिया गया।
- शिकायतकर्ता: पीथाजी का खेड़ा निवासी धन्नालाल पुत्र माधु भील, सांडगांव निवासी शंभु पुत्र श्रीराम बैरवा, मोहन लाल पुत्र श्रीराम बैरवा, रामेश्वर पुत्र श्रीराम बैरवा, देबीसिंहजी का खेड़ा निवासी रामेश्वर पुत्र छोगा मीणा, रामु पत्नी रोड़ा भील।
नगर निगम की कार्रवाई: अवैध निर्माणों पर चला पीला पंजा
फोटो- बीएचएल 02-03
भीलवाड़ा । शहर में अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम का अभियान गुरुवार को और ज्यादा आक्रामक रूप में नजर आया। निगम का पीला पंजा हरीसेवा मार्ग और प्रताप टाकिल व आस-पास के इलाके में गरजा और वर्षों से जमे पक्के अतिक्रमणों पर सीधी कार्रवाई करते हुए चबूतरों को ध्वस्त कर दिया गया। दुकानों के बाहर अवैध रूप से लगाए गए टीनशेड और केबिनों को भी मौके पर ही हटवा दिया गया। कार्रवाई से क्षेत्र में हडक़ंप मच गया और दुकानदारों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
निगम सूत्रों के अनुसार हरीसेवा मार्ग पर कई व्यापारियों ने दुकानों के आगे स्थायी और अस्थायी निर्माण कर सार्वजनिक मार्ग को संकरा कर दिया था। पक्के चबूतरे बनाकर सडक़ की जमीन घेर ली गई थी, जिससे आमजन और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। शिकायतों के बाद निगम ने सख्त रुख अपनाते हुए जेसीबी मशीन मौके पर उतारी और एक-एक कर सभी अवैध निर्माणों को तोड़ दिया।
कार्रवाई के दौरान कई स्थानों पर विरोध के स्वर भी उठे, लेकिन निगम दस्ते ने साफ कर दिया कि "सार्वजनिक मार्ग पर किसी भी प्रकार का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी कार्रवाई की गई और पुलिस बल भी तैनात रहा ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बने। इसके बाद निगम का दस्ता प्रताप टाकिज के बाहर और आजाद चौक क्षेत्र पहुंचा, जहां फुटपाथ और सडक़ पर फैले अतिक्रमणों को हटाया गया। निगम अधिकारियों ने चेतावनी दी कि "भविष्य में दोबारा अतिक्रमण पाए जाने पर और कड़ी कार्रवाई की जाएगी तथा जुर्माना भी लगाया जाएगा।"

Pratahkal Bureau
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