भीलवाड़ा। आज भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय की दीवारों ने एक ऐसी खामोश चीख सुनी, जिसने इंसानियत के वजूद पर सवाल खड़े कर दिए। जिस मासूम को मां की ममता और पिता के साये की जरूरत थी, उसे अपनों ने ही 'लावारिस' बनाकर पालना गृह में छोड़ दिया।

क्या कसूर था इस नन्हीं जान का?

9 महीने तक कोख में पालने वाली ममता आखिर इतनी पत्थर दिल कैसे हो गई? आज सुबह जब अस्पताल के पालना गृह की घंटी बजी, तो वह किसी के आने की खुशी नहीं, बल्कि एक मासूम के 'अपनों' द्वारा त्यागे जाने का मातम थी। 2.600 किलोग्राम की यह स्वस्थ और सुंदर बच्ची, जिसने अभी दुनिया को ठीक से देखा भी नहीं था, उसे समाज की संकीर्ण सोच या किसी मजबूरी के नाम पर लावारिस छोड़ दिया गया।

अस्पताल में जीवन की जद्दोजहद, समाज की मरी हुई नैतिकता

हैरानी की बात यह है कि बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है, लेकिन उसे छोड़ने वालों की मानसिकता 'बीमार' निकली। डॉ. कुलदीप सिंह और नर्सिंग प्रभारी सुनील जी पोरवाल की टीम बच्ची को संभालने में जुटी है। डॉक्टर दवाइयां तो दे सकते हैं, लेकिन उस 'ममता' का विकल्प कहां से लाएंगे जिसे यह समाज पालना गृह में छोड़ आया है?

बाल कल्याण समिति का कड़ा रुख

सूचना मिलते ही बाल कल्याण समिति के सदस्य विनोद राव अस्पताल पहुंचे। बच्ची की मासूमियत और उसकी बेबसी को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं। मीडिया से बात करते हुए विनोद राव ने कहा: "आज महात्मा गांधी चिकित्सालय के पालना गृह में एक नवजात बच्ची मिली है। बच्ची का वजन 2.600 किलो है। इसे अब बाल कल्याण समिति के संरक्षण में ले लिया गया है।" वहीं अन्य लोगों का सवाल यह है कि आखिर कब तक बेटियां इस तरह लावारिस छोड़ी जाती रहेंगी?

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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