भीलवाड़ा में शनिवार का दिन मौसम के एक नाटकीय बदलाव का गवाह बना। सुबह से ही झुलसा देने वाली धूप और भीषण उमस से बेहाल आमजन को शाम ढलते ही प्रकृति ने एक बड़ी राहत दी। आसमान में अचानक उमड़े घने काले बादलों ने कुछ ही समय में अपना रुख बदला और तेज़ अंधड़ के साथ झमाझम बारिश का दौर शुरू हो गया। इस दौरान शहर के नेहरू रोड सहित कई क्षेत्रों में बेर के आकार के ओले गिरे, जिन्हें देखकर स्थानीय लोग स्तब्ध रह गए। अचानक हुई इस ओलावृष्टि ने तापमान में भारी गिरावट दर्ज कराई और वातावरण में ठंडक घोल दी।


तूफानी हवाओं और मूसलाधार बारिश का असर जनजीवन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। ड्रेनेज व्यवस्था की खामियों के चलते शहर की सड़कें देखते ही देखते पानी-पानी हो गईं। वहीं, तेज़ अंधड़ के कारण रेलवे फाटक के समीप एक विशालकाय पेड़ जड़ से उखड़कर मुख्य मार्ग पर आ गिरा। गनीमत यह रही कि जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय वहाँ कोई राहगीर या वाहन मौजूद नहीं था, जिससे एक बड़ी जनहानि टल गई। पेड़ गिरने के कारण यातायात पूरी तरह बाधित हो गया, जिसके बाद नगर परिषद की टीम ने मोर्चा संभालते हुए मार्ग को सुगम बनाने की कार्यवाही शुरू की।

प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर भी इस बदलाव का व्यापक असर देखा गया। तेज़ हवाओं के वेग से कई कच्ची बस्तियों में घरों के टीन-टप्पर और दुकानों के साइन बोर्ड उखड़कर दूर जा गिरे। एहतियाती कदम उठाते हुए डिस्कॉम ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से शहर के बड़े हिस्से की विद्युत आपूर्ति को बाधित रखा, जिससे कई इलाके अंधेरे में डूबे रहे। यद्यपि इस तूफान ने कुछ स्थानों पर अव्यवस्था पैदा की, किंतु पिछले कई दिनों से भीषण लू और गर्मी के प्रकोप से जूझ रहे भीलवाड़ा वासियों के लिए यह बारिश एक बड़ी राहत बनकर आई है। मौसम का यह अचानक पलटाव शहर के लिए एक सुखद अनुभूति लेकर आया है, जिसने गर्मी के तीखे तेवरों को शांत कर दिया है।

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Pratahkal Newsroom

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