भीलवाड़ा शहर की संध्या अब साधारण नहीं रही, वह साधना बन चुकी है। हरिशेवा धाम में काशी की तर्ज पर गंगा आरती, शहर की हवा में घुली भक्ति, ऊर्जा और चेतना। विधानसभा अध्यक्ष सहित सैकड़ों की तादाद में संत, हजारों की तादाद में भक्त व शहरवासी रहे मौजूद।


काशी परंपरा की दिव्यता और आध्यात्मिक उत्सव

भीलवाड़ा के हरिशेवा उदासीन सनातन मन्दिर में आयोजित सनातन मंगल महोत्सव एवं दीक्षा दान समारोह के अंतर्गत प्रतिदिन हो रही काशी परंपरा की गंगा आरती ने शहर की शाम को आध्यात्मिक उत्सव में बदल दिया है। जैसे ही सूर्य अस्त होता है, वैसे ही आश्रम परिसर दीपों की पंक्तियों व विद्युतीकृत दीयों से जगमगा उठता है। शंखनाद, घंटियों की गूंज, मंत्रोच्चार और लहराते धूपदीप के साथ जब काशी की तर्ज पर गंगा आरती प्रारंभ होती है, तो वातावरण में ऐसी दिव्यता उतरती है कि हर आने वाला श्रद्धालु स्वयं को गंगातट पर खड़ा महसूस करता है।

सकारात्मक ऊर्जा और सामाजिक समरसता का केंद्र

  • यह गंगा आरती अब केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत बन चुकी है।
  • महोत्सव में देश दुनियां से भाग लेने पहुंचे श्रद्धालु मानते हैं कि इस आरती के दर्शन मात्र से मन की अशांति शांत होती है, तनाव दूर होता है और जीवन में आशा का संचार होता है।
  • इससे मन को स्थिरता मिल रही है, क्रोध और निराशा कम हो रही है, परिवारों में शांति और सौहार्द बढ़ रहा है।
  • युवाओं में सनातन संस्कृति के प्रति आकर्षण पैदा हो रहा है, जहाँ महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे एक साथ हाथ जोड़कर खड़े दिखाई देते हैं।

आरती की वैदिक विधि और महामंडलेश्वर का संदेश

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज ने बताया कि गंगा आरती की संपूर्ण विधि पूर्ण वैदिक परंपरा के अनुसार की जा रही है। तीन सेवादार और तीन सहयोगी पंडित मिलकर यह सेवा संपन्न करते हैं। सबसे पहले शुद्ध जल, पुष्प, अक्षत और दीप से मां गंगा का आवाहन किया जाता है। इसके बाद शंखनाद के साथ गंगा स्तुति और वैदिक मंत्रों का उच्चारण होता है।

"गंगा आरती संध्या की श्रेष्ठतम सेवा है। यह केवल दीप जलाने की क्रिया नहीं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा के विसर्जन और सकारात्मक ऊर्जा के जागरण का माध्यम है। विधिविधान से की गई यह आरती पूरे परिसर को शुद्ध करती है और भीलवाड़ा नगर के वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है। यही कारण है कि लोग इस आरती के दर्शन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना रहे हैं।"

आरती के दौरान उठती अग्निशिखाएं प्रतीक हैं, अज्ञान से ज्ञान की ओर, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर। आरती समाप्त होते ही उपस्थित श्रद्धालु दीपों की लौ को नमन कर मनोकामना करते हैं और संकल्प लेते हैं कि वे अपने जीवन में भी पवित्रता और सेवा भाव को अपनाएंगे।

विद्वानों का महासंगम और विश्व कल्याण के अनुष्ठान

सनातन मंगल महोत्सव के दौरान महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज के मार्गदर्शन में काशी, वृंदावन और वाराणसी सहित विभिन्न तीर्थ स्थलों से 180 से अधिक विद्वान पधारे हैं।

  • वृंदावन से आए पीठाचार्य श्रीराम कुमार मुद्गल के निर्देशन में श्री अष्टोत्तर शत (108) भागवत मूल पाठ का आयोजन हो रहा है।
  • काशी के यज्ञाचार्य कामेश्वरनाथ तिवारी के सान्निध्य में यज्ञ संपादन एवं चारों वेदों के मूल पाठ का पारायण किया जा रहा है।
  • इन अनुष्ठानों का उद्देश्य केवल धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि विश्व शांति, समाज कल्याण और सर्व मंगल की कामना है।

भक्ति और कला का संगम: श्रीधाम वृंदावन की रासलीला

महोत्सव की शाम और भी दिव्य हो जाती हैं जब श्रीधाम वृंदावन के रसिकाचार्य कुंजबिहारी शर्मा के निर्देशन में श्री निकुंज बिहारी रासलीला मंडल मंच पर उतरता है। प्रतिदिन शाम 7 बजे से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया जा रहा है जैसे बाल लीला, गोवर्धन धारण, रास और प्रेम लीला। यह मंचन केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भक्ति, करुणा, सेवा और प्रेम के जीवन मूल्यों की शिक्षा देता है।

रविवार के आयोजन में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी सहित अनेक अतिथि और श्रद्धालु शामिल हुए, जिससे यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर का आध्यात्मिक आकर्षण बनता जा रहा है।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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