हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में सनातन सेवा समिति एवं महामंडलेश्वर स्वामी श्री हंसराम जी उदासीन महाराज के सान्निध्य में पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर आयोजित श्री शिव महापुराण कथा महोत्सव का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के वातावरण में विधिवत रूप से संपन्न हुआ। प्रारंभ में महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन, संत मायाराम, संत गोविन्द राम, संत राजाराम, संत ईशान राम, संत सुयज्ञ राम एवं संत केशव राम द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्री शिवमहापुराण ग्रंथ का पूजन-अर्चन किया गया। इसके पश्चात ग्रंथ को शोभायात्रा के रूप में मंदिर से कथा सभागार लाकर विधिवत मंत्रोच्चार के साथ व्यासपीठ पर स्थापित किया गया।

व्यासपीठ से उदासीन संस्कृत विद्यालय, काशी (उ.प्र.) के ओजस्वी वक्ता स्वामी डॉ. निर्मल दास जी महाराज ने भगवान शिव की महिमा, शिवतत्व एवं सनातन संस्कृति के विविध आध्यात्मिक आयामों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने श्रीशिवमहापुराण का श्लोक “पुराणश्रवणं शम्भोर्नाम संकीर्तनं तथा। कल्पद्रुमफलं सम्यङ् मनुष्याणां न संशयः॥” उद्धृत करते हुए कहा कि भगवान शंकर के महापुराण का श्रवण तथा उनके नाम का संकीर्तन मनुष्यों को कल्पवृक्ष के समान समस्त शुभ फलों की प्राप्ति कराता है, इसमें किसी प्रकार का संदेह नहीं है। साथ ही उन्होंने एक अन्य श्लोक “सर्व पापविनिर्मुक्तः सद्यः शिवपदं लभेत्। अथवा सप्तरात्रं वा वसेद्वा पञ्चरात्रकम्॥” का उल्लेख करते हुए कहा कि जो श्रद्धापूर्वक शिव महापुराण का श्रवण करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर शिवलोक अथवा शिवपद को प्राप्त करता है, तथा सात अथवा पांच रात्रियों तक कथा श्रवण करने से भी महान आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।

कथा के दौरान स्वामी डॉ. निर्मल दास जी महाराज ने देवराज ब्राह्मण एवं शोभना प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया। उन्होंने बताया कि देवराज नामक ब्राह्मण सदाचार से भटककर पापकर्मों में लिप्त हो गया और शोभना नामक वेश्या (गणिका) के मोह में अपना जीवन व्यतीत करने लगा। दोनों अनेक अनुचित कर्मों के कारण पाप के भागी बने। एक समय देवराज संयोगवश उस स्थान पर पहुँचा जहाँ शिवपुराण की कथा चल रही थी और अनिच्छा के बावजूद कथा श्रवण करता रहा। शिवमहिमा, भक्ति एवं धर्मोपदेशों के श्रवण से उसके भीतर परिवर्तन आया और मृत्यु के समय भगवान शिव की कृपा से उसके पाप क्षीण हो गए तथा उसे शिवलोक की प्राप्ति हुई। वहीं शोभना को भी पुण्यफल प्राप्त हुआ और यमदूतों के आगमन पर शिवदूतों ने हस्तक्षेप कर उसे भगवान शिव की शरण में पहुँचाया।

स्वामी डॉ. निर्मल दास जी महाराज ने कहा कि अनजाने में भी शिवकथा का श्रवण महान पापों का नाश करने वाला होता है तथा सच्चा पश्चात्ताप और भगवान शिव की शरण जीवन में परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने भगवान शिव को करुणामय एवं आशुतोष बताते हुए कहा कि वे भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सत्संग और धर्मकथा व्यक्ति के जीवन को बदलने की क्षमता रखते हैं तथा शिवमहापुराण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि धर्म, सदाचार और मोक्ष का दिव्य ज्ञानसागर है, जिसके श्रवण से अंतःकरण की शुद्धि एवं संचित पापों का क्षय होता है।

कथा के दौरान भजन गायन मंडली द्वारा प्रस्तुत “आओ महिमा गाए भोलेनाथ की, भक्ति में खो जाए भोलेनाथ की, जय बोलो जय बोलो भोलेनाथ की” पर श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे और संपूर्ण पांडाल शिवमय वातावरण से गूंज उठा। अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया।

इससे पूर्व प्रातःकाल श्री विष्णु यज्ञ में अभय, रितिका, चंदा टेलर एवं आशीष माहेश्वरी ने आहुतियाँ दीं तथा महादेव का अभिषेक कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। सायंकाल प्रतिदिन काशी की तर्ज पर गंगा आरती, आठों पहर रामधुन एवं दुर्गा सप्तशती पाठ का आयोजन हो रहा है। संत मायाराम एवं संत गोविन्दराम ने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे पुरुषोत्तम मास के दौरान हरिशेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर भीलवाड़ा में प्रवाहित हो रही धर्म, भक्ति एवं सत्संग की त्रिवेणी का अधिकाधिक लाभ लें।

यह संपूर्ण आयोजन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ संपन्न होकर श्रद्धालुओं के लिए मोक्षमार्ग की प्रेरणा का केंद्र बना।

Pratahkal Bureau

Pratahkal Bureau

प्रातःकाल ब्यूरो, प्रातःकाल न्यूज़ की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा ब्यूरो राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

Next Story