भीलवाड़ा: हरिशेवा उदासीन आश्रम में हुआ श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह उत्सव
पुरुषोत्तम मास महोत्सव के तहत आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की लीलाओं का रसपूर्ण निरूपण किया।

भीलवाड़ा के हरिशेवा उदासीन आश्रम में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान स्वामी अशोकानंद जी महाराज द्वारा श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का वाचन।
भीलवाड़ा स्थित हरिशेवा उदासीन आश्रम में महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के पावन सानिध्य में चल रहे पुरुषोत्तम मास महोत्सव के अंतर्गत संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति के सागर में सराबोर कर दिया। कथा सभागार में भक्ति और उल्लास के वातावरण के बीच भगवान श्रीकृष्ण एवं माता रुक्मिणी के दिव्य विवाह उत्सव की मंगलमय झांकी ने भक्तों को भावविभोर कर दिया।
कथाव्यास पूज्य स्वामी अशोकानंद जी महाराज (भक्ति धाम आश्रम, नर्मदा तट, जबलपुर) ने उद्धव-गोपी संवाद के माध्यम से गोपी प्रेम की महिमा का विशद वर्णन किया। स्वामी जी ने श्रीमद्भागवत के प्रसंगों का रसपूर्ण निरूपण करते हुए श्रीकृष्ण का मथुरा गमन, अक्रूर जी का आगमन, कंस मर्दन तथा श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की दिव्य लीलाओं को विस्तार दिया। उन्होंने श्रीमद्भागवत के प्रसिद्ध श्लोक- “आसामहो चरणरेणुजुषामहं स्यां वृन्दावने किमपि गुल्मलतौषधीनाम्...” का भावार्थ समझाते हुए बताया कि उद्धव जी स्वयं गोपियों की अनन्य भक्ति से अभिभूत होकर उनके चरणों की धूलि प्राप्त करने की कामना करते हैं। उन्होंने कहा कि गोपियों ने लोक-लाज, कुल-मर्यादा और सांसारिक बंधनों से ऊपर उठकर जिस परम प्रेम को प्राप्त किया, उसकी खोज वेद एवं उपनिषद भी करते हैं।
स्वामी अशोकानंद जी महाराज ने रुक्मिणी जी के अटूट विश्वास, समर्पण और प्रेम को भक्त और भगवान के दिव्य संबंध का अनुपम उदाहरण बताते हुए स्पष्ट किया कि जब रुक्मिणी जी ने हृदय में श्रीकृष्ण को पति रूप में स्वीकार किया, तब भगवान स्वयं उनकी रक्षा के लिए पहुंचे। यह प्रसंग सिद्ध करता है कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण कभी व्यर्थ नहीं जाता। विवाह प्रसंग के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भजनों एवं जयघोषों के साथ उत्सव मनाया और पूरा वातावरण “राधे-श्याम” तथा “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोषों से गुंजायमान हो उठा।
पुरुषोत्तम मास के उपलक्ष्य में आश्रम में प्रतिदिन विष्णु यज्ञ, रुद्राभिषेक, संकीर्तन एवं गंगा आरती जैसे धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं। शनिवार को गोपाल-सुनीता नानकानी एवं सुरेश-वंदना आहुजा ने सपत्नीक विष्णु यज्ञ में आहुतियां प्रदान कर भगवान महादेव का रुद्राभिषेक किया। आश्रम के संत मायाराम ने जानकारी दी कि रविवार को श्रीमद्भागवत कथा का विश्राम दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक होगा। इसके पश्चात 8 जून से 14 जून तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से 6 बजे तक शिव महापुराण कथा का आयोजन होगा। पुरुषोत्तम मास महोत्सव का समापन 15 जून को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों के साथ होगा। इस अवसर पर संत गोविन्दराम, संत राजाराम, संत ईशानराम एवं संत सुयज्ञराम सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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