भीलवाड़ा। हरि शेवा उदासीन आश्रम में सतगुरु बाबा शेवाराम साहेब जी का मासिक जन्म उत्सव श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आश्रम परिसर में विशेष सत्संग का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन ने सत्संग के माध्यम से श्रद्धालुओं को सतगुरु की महिमा, सेवा, सिमरन एवं सद्मार्ग पर चलने का संदेश दिया। सत्संग के दौरान उन्होंने ‘‘इंदे ही मुखे सतगुरुन सतनाम चवायो’’ भजन गाकर श्रद्धालुओं को भक्तिभाव से जोड़ा। उन्होंने बाबा शेवाराम साहेब जी की महिमा का बखान करते हुए उनका स्मरण किया, जिससे आश्रम परिसर भक्तिरस से सराबोर हो गया।

कार्यक्रम के अंत में आरती एवं अरदास की गई। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं ने भंडारा प्रसाद ग्रहण किया। आयोजन में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ भाग लेकर आश्रम के आराध्य सतगुरु बाबा शेवाराम साहेब जी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

इस अवसर पर श्री मान महंत सत मुनि जी महाराज उत्तर पंगत (पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन), संत अचलेश्वरानंद जी महाराज, संत अरविंद दास जी, आश्रम के संत मायाराम, राजाराम, गोविन्दराम, केशवराम, बालक मिहिर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुगण व ट्रस्टी उपस्थित रहे।

भाद्रपद पूर्णिमा का धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व

भाद्रपद पूर्णिमा का हिन्दू धर्म में विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना गया है। यह पावन तिथि भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के लिए विशेष मानी जाती है। इस दिन तीर्थ स्नान, दान-पुण्य, व्रत तथा भगवान सत्यनारायण की कथा का विशेष विधान है।

भाद्रपद पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालु सत्यनारायण भगवान का व्रत रखते हैं और विधि-विधान से पूजा कर कथा का श्रवण करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धापूर्वक सत्यनारायण व्रत एवं कथा करने से परिवार में सुख-समृद्धि, शांति और धन-धान्य की वृद्धि होती है। इस दिन भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा-अर्चना और व्रत का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि शिव-पार्वती की आराधना करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति तथा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

भाद्रपद पूर्णिमा से पितृपक्ष यानी श्राद्ध पक्ष की शुरुआत भी मानी जाती है। इस अवसर पर लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनके निमित्त तर्पण, दान-पुण्य एवं धार्मिक कार्य करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पितरों के निमित्त श्रद्धापूर्वक किए गए दान-पुण्य से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस प्रकार भाद्रपद पूर्णिमा आस्था, उपासना, दान-पुण्य और पूर्वजों के स्मरण का विशेष पर्व है, जो धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

Rajesh Toshniwal, Bhilwara

नाम: राजेश तोषनीवाल

वर्तमान पद: ब्यूरो चीफ (भीलवाड़ा)

कार्यक्षेत्र: भीलवाड़ा (राजस्थान)

बीट (मुख्य विषय): राजनीति, क्राइम, प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और बिज़नेस

परिचय 

राजेश तोषनीवाल राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के वरिष्ठ पत्रकार और ब्यूरो चीफ हैं। वह राजनीति, अपराध (क्राइम), स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक गतिविधियों (बिज़नेस) सहित सभी मुख्य विषयों पर नियमित रिपोर्टिंग करते हैं। मौके पर पहुंचकर सक्रियता से ग्राउंड रिपोर्टिंग करना उनकी मुख्य विशेषता है।

पत्रकारिता का अनुभव (Work Experience)

राजेश तोषनीवाल को पत्रकारिता के क्षेत्र में कुल 44 वर्षों का व्यापक अनुभव है।

  • वह पिछले 35 वर्षों से अधिक समय से 'प्रातःकाल' समाचार पत्र से निरंतर जुड़े हुए हैं।
  • इससे पूर्व उन्होंने 'दैनिक जागरण', 'नवभारत टाइम्स' सहित कई अन्य लोकल एवं राज्यस्तरीय मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं।

शैक्षणिक योग्यता (Education)

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

Next Story