राम मंदिर निर्माण 500 वर्षों की तपस्या का परिणाम, हिंदुत्व की भावना को जीवंत रखने का आह्वान: स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज
भीलवाड़ा के हरी शेवा उदासीन आश्रम में स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज के भव्य स्वागत ने आध्यात्मिक माहौल को नई ऊंचाई दी। राम मंदिर, हिंदुत्व और सनातन परंपरा पर दिए गए उनके उद्बोधन ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया।

भीलवाड़ा के हरी शेवा उदासीन आश्रम में शनिवार रात्रि को स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज (बाएं से चौथे) को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित करते महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम उदासीन महाराज (बाएं से तीसरे) व अन्य संत।
भीलवाड़ा में हरी शेवा उदासीन आश्रम बना आध्यात्मिक चेतना का केंद्र, संत समाज और प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में हुआ भव्य अभिनंदन समारोह
भीलवाड़ा। भीलवाड़ा स्थित हरी शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में शनिवार रात्रि को एक भव्य धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन संपन्न हुआ, जिसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या के कोषाध्यक्ष तथा महामंडलेश्वर स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज का संत समाज एवं प्रबुद्धजनों द्वारा गरिमामय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
यह आयोजन आश्रम के महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज के सानिध्य में आयोजित हुआ, जिसमें संतों एवं श्रद्धालुओं की बड़ी उपस्थिति देखने को मिली। कार्यक्रम में आश्रम से जुड़े अनेक संतों सहित संत माया राम, संत राजाराम, संत गोविंद राम, संत ईशान राम, संत सुयज्ञ राम, संत केशव राम तथा ब्रह्मचारी मिहिर और यश विशेष रूप से मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ने अपने उद्बोधन की शुरुआत “चंदन है इस देश की माटी, तपोभूमि हर ग्राम है” की पंक्तियों से की। उन्होंने कहा कि हरी शेवा उदासीन आश्रम में आकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता और आत्मिक शांति का अनुभव हुआ। उन्होंने सनातन मंगल महोत्सव के दौरान दीक्षा ग्रहण करने वाले स्वामी हंसराम जी के शिष्यों का भी अभिनंदन किया और संत परंपरा को समाज के लिए मार्गदर्शक बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संतों की प्रेरणा से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। उन्होंने स्वामी हंसराम जी उदासीन के धर्म प्रचार और हिंदुत्व जागरण के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समाज के प्रबुद्ध वर्ग को अपने धर्म, राष्ट्र और सनातन परंपरा के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ने भारत को केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बताया। उन्होंने राजस्थान की वीरता, त्याग और संत परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भूमि महाराणा प्रताप, पृथ्वीराज चौहान और मीराबाई जैसी महान विभूतियों की कर्मभूमि रही है, जिसने राष्ट्रभक्ति और संस्कृति की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की है।
उन्होंने कहा कि अनेक आक्रमणों और संघर्षों के बावजूद भारत की सनातन संस्कृति अक्षुण्ण रही है और लगभग 500 वर्षों की तपस्या एवं संघर्ष के बाद अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण का सपना साकार हुआ है, जिसे वर्तमान पीढ़ी ने अपनी आंखों से देखा है।
कार्यक्रम में उन्होंने यह भी कहा कि देश में हो रहे सकारात्मक परिवर्तनों में संत समाज, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ तथा समर्पित कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने “विरासत के साथ विकास” की नीति की सराहना करते हुए कहा कि राष्ट्र की प्रगति और धर्म संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए।
इस अवसर पर स्वामी हंसराम जी उदासीन महाराज ने कहा कि संतों के आगमन से आश्रम की शोभा बढ़ती है और उन्होंने स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज का आभार व्यक्त करते हुए आश्रम पर कृपादृष्टि बनाए रखने का अनुरोध किया।
कार्यक्रम के अंत में स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ने आश्रम स्थित भगवान श्री श्रीचंद्र जी के दर्शन, यज्ञशाला, चार समाधियों एवं हरि सिद्धेश्वर महादेव के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर पंचमुखी दरबार के श्री महंत लक्ष्मण दास त्यागी, महंत बृजमोहन दास जी महाराज सहित अनेक संत, प्रचारक, प्रबुद्धजन एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मातृशक्ति की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही, जिसमें अनेक श्रद्धालु महिलाएं शामिल थीं।

Pratahkal Bureau
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